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केन्द्रीय मंत्री तोमर ने संसद में कहा-केन्द्र ने पंचायतों के विकास हेतु 58 करोड़ से बढ़ाकर किये 2 लाख 292 करोड़

 

केन्द्रीय पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज लोकसभा में प्रश्नकाल में बताया कि लोकतंत्र में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है. इस कारण लोकतंत्र के इस संस्थान को ताकतवर बना दें तो देश में काफी अच्छा काम हो सकता है. पंचायतें आर्थिक रूप से सक्षम हों, पंचायतें तकनीकि रूप से सक्षम हों, पंचायतें पारदर्शिता से काम कर सकें, पंचायतों को टेक्निकल सपोर्ट मिल सके, पंचायतों में ठीक प्रकार से प्रशिक्षण हो सके, इस दिशा में केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है.
उन्होंने सदन को बताया कि सभी पंचायतें ई-पंचायत के रूप में विकसित हों, इसलिए ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना लागू की गई है.
उन्होंने कहा कि दूर संचार विभाग को प्रधानमंत्री जी ने आप्टीकल फाइवर बिछाने का निर्देश दिया है. केन्द्र में हमारी सरकार आने से पहले केवल 56 पंचायत मे आप्टीकल फाइवर का कार्य हुआ था, जब कि अब 1 लाख से ज्यादा पंचायतें आप्टीकल फाइवर युक्त हो चुकी हैं तथा शेष 2019 तक शतप्रतिशत हो जायेंगी.
उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जी की प्राथमिकता है कि देशभर में व्यक्तियों में गैर बराबरी समाप्त हो और विकास की दृष्टि से देश में जो असंतुलन खड़ा हो गया है, वह समाप्त होकर संतुलित हो. प्रधानमंत्री जी 1 साल से चिंतित थे कि देश में कुछ जिले ऐसे जिले हैं, जो विकास की दौड़ में और अन्य पैरामीटर्स में पिछड़ रहे हैं. इसलिए उन्होंने 115 जिलों का चयन किया है, जिससे कि उन्हें बराबर के स्तर पर लाया जा सके. इस हेतु केन्द्र सरकार के एक एक अफसर को भी लगाया गया है.
श्री तोमर ने सदन को बताया कि केन्द्र में हमारी सरकार आने के पहले पंचायतों को 5 वर्ष के लिए केवल 58,256 करोड़ दिये जाते थे, हमारे प्रधानमंत्री जी ने उसे बढ़ाकर 2 लाख 292 हजार करोड़ कर दिये हैं. इसके अलावा सभी प्रकार का तकनीकी सहयोग केन्द्र देने को तैयार है.
उन्होंने लोकसभा में बताया कि भारत नेट योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 12655 पंचायतों में 12539 किमी क्षेत्र में पाईप तथा 11970किमी क्षेत्र में केबिल बिछायी जा चुकी है.
श्री तोमर ने पूरक प्रश्न के उत्तर में लोकसभा को बताया कि पंचायती राज की कल्पना 1984 से राजीव गाँधी के माध्यम से नहीं आई है. बल्कि प्राचीनकाल से भारत में पंचायतों की व्यवस्था *-“पंच परमेश्वर”* के रुप में प्रचलित रही है. गाँव के निर्णय गाँव में ही हुआ करते थे और उस समय भी बड़े-बड़े मामले पंचायत के माध्यम से निपटाये जाते थे. इसलिए हमारी सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है.

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