कोरोना से जारी जंग के अंतर्गत जारी रोको टोको अभियान के दौरान शहरवासियों को मास्क लगाने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने जैसे नियमों को पालन करने हेतु बाध्य किया जा रहा है । ऐसा न करने वाले नागरिकों को जबरन खुली जेल में पहुंचाने का काम भी पुलिस प्रशासन कर रहा है । इसके लिए बाकायदा जोरदार जनजागरण अभियान भी प्रशासन चला रहा है जिसमें शहर के अनेक समाजसेवी संगठनों को सहभागी किया गया है। निःसंदेह यह एक बेहद अच्छा अभियान है और इसमें सभी को अपनी भूमिका निभाने की जरूरत भी है। तभी कोरोना से जारी जंग हम जीत पाएंगे। देश के प्रधानमंत्री ने भी सन्देश दिया है जब तक दवाई नहीं तबतक ढिलाई नहीं । लेकिन कईबार ऐसी तस्वीरें सामने आ जाती है जिन्हें देखकर मन कांप उठता है। यह भी सवाल उठ खड़ा होता है की सारे कायदे कानून और सीख आम जनता के लिए ही है उच्च नोकरशाही इन नियमों से अपने को अछूता मानकर जो मर्जी आये वो करने के लिए स्वतंत्र है फिर इसका कितना ही गलत संदेश क्यों न जाए।
कोरोना से जंग : जनता को जेल कमिश्नर साहब को खुली छूट
हम जिस तस्वीर की बात कर रहे हैं वह ग्वालियर नगरनिगम कमिश्नर संदीप माकिन से सम्बंधित है। श्री माकिन रोजाना की तरह आज भी स्वकच्छता अभियान का निरीक्षण करने आनंद नगर पहुंचे थे यहां निगमायुक्त ने स्वयं खड़े होकर वीनस पब्लिक स्कूल के सामने बने अस्थाई कचरे ठिए पर बड़ी मात्रा में कचरा पाए जाने पर स्वयं खड़े होकर तत्काल कचरा ठिया साफ कराया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि कचरा ठिया को व्यवस्थित करें। इसके साथ ही कचरा उठाने का समय जल्दी और नियमित करें।
जिस समय श्री माकिन कचरा व अतिक्रमण हटाने को लेकर स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर रहे थे उस समय उनके चेहरे से मास्क गायब था शायद कमिश्नर साहब ये भूल गए की शहर में इसी का पालन न करने पर आम जन को खुली जेल में पहुंचाने का अभियान वही प्रशासन चला रहा है जिसके की वे खुद भी नुमाइंदे हैं। अब भला जिनके ऊपर इसकी जिम्मेदारी है वही
सार्वजनिक स्थानों पर जनता के बीच खड़े होकर मास्क नहीं लगाएंगे तो क्या संदेश जाएगा। अब देखना दिलचस्प होगा प्रशासन के मुखिया इनकी गलती को यूं ही टाल देते हैं या फिर सांकेतिक ही सही कोई पनिशमेंट भी देते हैं।
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