सीपीआई (एमएल) लिबरेशन पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक, कविता कृष्णन ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। पार्टी के शीर्ष निकाय यानी पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन दो दशक से अधिक समय तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की केंद्रीय समिति की सदस्य भी थीं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि उनके अनुरोध पर पार्टी ने उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है।
फेसबुक पर घोषणा करते हुए उन्होंने लिखा, “मैंने सीपीआईएमएल में अपने पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त होने का अनुरोध किया था क्योंकि मुझे कुछ परेशान करने वाले राजनीतिक सवाल पूछने की जरूरत थी। ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनको उठाना सीपीआईएमएल नेता के रूप में मेरी जिम्मेदारियों में रहते हुए संभव नहीं था। पार्टी सेंट्रल कमेटी ने मेरे अनुरोध पर सहमति जताई है।”
गौरतलब है कि उन्होंने हाल ही में यूक्रेन-रूस संघर्ष पर ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि समाजवादी शासन संसदीय लोकतंत्रों से कहीं अधिक निरंकुश शासन थे। कविता कृष्णन के ये सवाल जाहिर तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी को रास नहीं आए। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि सीपीआई (एमएल) लिबरेशन यकीनन दुनिया में समाजवादी शासन चाहती है। कम्युनिस्ट पार्टी कथित तौर पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) जैसी कम्युनिस्ट पार्टियों से प्रेरणा लेती है। इसलिए कविता कृष्णन का कम्युनिस्ट सरकारों से सवाल पूछना उनकी पार्टी को पसंद नहीं आया।
कविता कृष्णन टीवी के अलावा ट्विटर पर भी पार्टी का प्रमुख मुखर चेहरा हैं। उन्होंने कहा कि वे अब अपने लेखन के माध्यम से सवाल उठाएंगी क्योंकि अगर वह पार्टी के पदों पर रहीं तो वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “यह पहचानने की जरूरत है कि सोवियत संघ के दौरान स्टालिन के शासन की या फिर विफल चीनी समाजवाद की चर्चा करना अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि वे दुनिया के कुछ सबसे खराब सत्तावादी थे जो हर जगह सत्तावादी शासन के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर रहे हैं।” वह अपने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी इन सवालों को उठाती रही हैं जिनके बारे में उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा है। जुलाई में, उन्होंने कहा था कि स्टालिन के तहत सोवियत संघ (यूएसएसआर) का औद्योगीकरण “यूक्रेन के किसानों को हिंसक रूप से गुलाम बनाकर” किया गया था।