प्रवीण दुबे
क्या मध्यप्रदेश में 48 घंटे बाद कुछ बड़ा होने वाला है ? अथवा मध्य प्रदेश का भाजपा नेतृत्व इस मौके पर भी हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा ? आप समझ ही गए होंगे हमारा इशारा है 19 मई को भोपाल में होने जा रही भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक की ओर है। कर्नाटक जैसे बड़े राज्य मैं मिली करारी हार के बाद अब मध्यप्रदेश को बचाना भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो चला है। इस बात के मद्देनजर 19 मई को होने जा रही प्रदेश कार्यसमिति की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
यूं तो प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का आयोजन पार्टी की सामान्य परंपरागत गतिविधि कहा जा सकता है लेकिन मध्यप्रदेश में 6 माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव और चंद दिनों पूर्व कर्नाटक में मिली पराजय ने इस बैठक को चर्चा में ला दिया है।
चूंकि मध्यप्रदेश मैं भाजपा सरकार जबरदस्त एंटी इंकम्बेंसी की चपेट में है और पिछले एक डेढ़ महीनों में डैमेज कंट्रोल के लिए आहूत की गई बैठकों में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं , नेताओं ने जिस प्रकार आक्रामक लहजे में पार्टी हाईकमान के सामने अपनी बात रखी है उस बात को दृष्टिगत रखकर यह कहा जा सकता है कि 19 मई की प्रदेश कार्यसमिति की यह बैठक भी हंगामाखेज बन जाए तो कोई बड़ी बात नहीं।इसको लेकर पार्टी नेतृत्व पशोपेश में दिखाई देता है ।
इतना ही नहीं मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा के भीतर पनप रहे तीन से चार बड़े नेताओं के गुटों ने पार्टी हाईकमान की नींद हराम कर दी है। पार्टी द्वारा कराए गए तमाम सर्वे व जनता के बीच से उठ रही तमाम आवाजों को ध्यान में रखा जाए तो प्रदेश में सक्रिय तमाम बड़े चेहरों को विश्राम दिए जाने व नए नेतृत्व को आगे लाने की इच्छा साफ तौर पर नजर आती है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में आने वाले समय में पार्टी को जहां विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले चेहरों के नाम तय करना होंगे, वहीं संगठनात्मक स्तर पर अपने नेटवर्क को इस रूप में तैयार करना होगा कि तमाम जमीनी कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर पार्टी की छवि और उसके तमाम कल्याणकारी कार्यों का बखान कर सकें यह तभी संभव होगा जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अभी से ही तमाम जिम्मेदारियों को तय कर देगा।
इन तमाम कारणों की वजह से प्रदेश कार्यसमिति की बैठक भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि पार्टी में पनप रही गुटबाजी और कार्यकर्ताओं में उनकी अनदेखी को लेकर व्याप्त रोष ने भाजपा के लिए किसी भी निर्णय को लेना कठिन बना दिया है जहां तक प्रत्याशियों के चयन का विषय है पार्टी में ज्योतिरादित्य सिंधिया नरेंद्र सिंह तोमर खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और द्वितीय पायदान पर खड़े तमाम ऐसे क्षत्रप नजर आ रहे हैं जिनके चुनाव लड़ने वाले नजदीकियों या राजनीति की भाषा में कहें तो पट्ठों की संख्या इतनी अधिक है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व के होश उड़े हुए हैं। टिकिट मागने वाले पुराने नेताओं की हर हाल में चुनाव मैदान में उतरने की धमकी का दबाव भी पार्टी नेतृत्व को परेशान किए हुए है।
जहां तक कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाने की बात है वह तभी संभव हो सकेगा जब कार्यकर्ता स्वस्थ मन से पार्टी नेतृत्व के दिखाए मार्ग पर चलने को तैयार होगा । फिलहाल कार्यकर्ताओं का जो मूड नजर आता है उसे देखकर ऐसा लगता है की जनता के बीच जाकर जमीनी स्तर पर काम करने की मानसिकता अभी वह नहीं बना पा रहा है।
जहां तक मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की बात है वह तभी संभव है जब भाजपा को संचालित करने वाली तिकड़ी इसके लिए कोई बड़ा निर्णय लेगी साफ है की नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा प्रदेश कार्यसमिति मैं आएगा इसकी संभावना बेहद कम है लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता जैसी की जानकारी मिली है प्रदेश कार्यसमिति कि 19 तारीख को होने वाली बैठक से पूर्व 18 मई को भाजपा कोर ग्रुप की बैठक आहूत की गई है इस बैठक में 19 तारीख को होने वाली बैठक के एजेंडे पर चर्चा कि जाना है, पार्टी यदि मध्यप्रदेश में परिवर्तन संबंधी कोई बड़ा निर्णय लेगी तो उसकी सुगबुगाहट 18 तारीख कोर ग्रुप की बैठक में जरूर नजर आ जाएगी हालांकि इस तरह की संगठनात्मक बैठक से मीडिया को दूर रखा जाता है बावजूद इसके यदि कोई परिवर्तन की संभावना होगी तो उसे नजरअंदाज करना भी पार्टी के लिए बेहद मुश्किल होगा।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 मई को बोर्ड की बैठक के बाद 19 मई को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक प्रातः 9:00 बजे से प्रारंभ होगी दोपहर 12:30 बजे भोजन पश्चात लगातार शाम 6:00 बजे तक कई सत्रों में अलग-अलग मुद्दों पर मंथन होगा। इस कार्यसमिति की बैठक में वर्ष 2018 में हारी हुई विधानसभा सीटों के लिए भी कार्ययोजना बनाई जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि यह बैठक पहले भिंड में प्रस्तावित थी, लेकिन कर्नाटक में आए अप्रत्याशित परिणामों को देखते हुए इसे राजधानी भोपाल में आयोजित करने पर सहमति बनी है।
बैठक में कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित और स्थायी आमंत्रित सदस्य, पार्टी के सभी सांसद, विधायक, प्रकोष्ठों और विभागों के प्रदेश संयोजक, जिला अध्यक्ष और प्रभारी, विभिन्न मोर्चों के राष्ट्रीय पदाधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष एवं महामंत्री, महापौर, जिला पंचायत, निगम-मंडल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, आकांक्षी (लगातार पराजय वाली सीटें) विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी, विस्तारक और विशेष संपर्क अभियान की जिला टोलियों के संयोजक-सह संयोजकों को बुलाया गया है।