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ग्वालिपर में उपलब्ध है संविधान की मूल प्रति,संविधान सभा में शामिल थे ग्वालियर के दो प्रतिनिधि

संविधान की मूल प्रति आम नागरिकों के अवलोकनार्थ रखी गई

ग्वालियर के केन्द्रीय पुस्तकालय में उपलब्ध है भारतीय संविधान की मूल प्रति

ग्वालियर / दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का संविधान तैयार करने में ग्वालियर का भी योगदान रहा है। संविधान सभा में ग्वालियर रियासत की ओर से दो प्रतिनिधि लेफ्टीनेंट कर्नल श्री बृजराज नारायण व हेमचन्द्र जगोबाजी खांडेकर सक्रिय सदस्य के रूप में थे। भारत का अपना संविधान तैयार करने के लिए बनी संविधान सभा में 11 ब्रिटिश प्रांतों से 299 सदस्य चुने गए थे। इसके अलावा भारतीय रियासतों के 93 प्रतिनिधि भी शामिल किए गए थे, जिनमें ग्वालियर रियासत के भी दो प्रतिनिधि सम्मिलित थे। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर भी मध्यप्रदेश के महू में जन्मे थे।
संविधान सभा ने 2 वर्ष 11 महीने 17 दिन में संविधान तैयार किया था। आज ही के दिन यानि 26 नवम्बर 1949 में भारत का संविधान अपनाया गया था। इसीलिए हर साल 26 नवम्बर को संविधान दिवस मनाया जाता है। संविधान सभा के सभी सदस्यों ने संविधान की तीन प्रतियों, एक हस्तलिखित अंग्रेजी, एक छपी अंग्रेजी और एक हस्तलिखित हिंदी पर सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर किए, जो आज भी मौजूद हैं। भारत का यह अपना संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।

संविधान की मूल प्रति आम नागरिकों के अवलोकनार्थ रखी गई

केन्द्रीय पुस्तकालय में उपलब्ध है भारतीय संविधान की मूल प्रति

भारतीय संविधान की मूल प्रति ग्वालियर में भी मौजूद है। महाराज बाड़ा स्थित शासकीय केन्द्रीय पुस्तकालय में यह प्रति रखी हुई है। साथ ही इसकी डिजिटल प्रतिलिप भी पुस्तकालय में तैयार की गई है। संविधान दिवस पर संविधान की यह मूल प्रति सहित देश की आजादी से संबंधित 21 पुस्तकें केन्द्रीय पुस्तकालय में शहर के आम नागरिकों के अवलोकन के लिये रखी गई है।

संविधान की मूल प्रति देखने के लिये बड़ी संख्या में शहर के नागरिक पहुँचे। लगभग 600 नागरिकों ने संविधान की मूल प्रति एवं डिजिटल प्रति को 65 इंच की स्क्रीन पर देखा। संविधान की मूल प्रति देखने आए नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों एवं पुस्तकालय प्रबंधक श्री विवेक कुमार सोनी व अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के साथ संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन भी किया।

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