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ग्वालियर से चुनाव की दौड़ में तोमर सबसे आगे,भिंड से प्रसाद और मुरैना से मिश्रा की दावेदारी पर संशय

प्रवीण दुबे

लोकसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनावी समर में किस नेता को प्रत्याशी बनाया जाता है । ग्वालियर अंचल में भी इसको लेकर मतदाता टकटकी लगाए बैठे हैं । केंद्र की सत्ता पर काबिज राजनीतिक दल भाजपा की बात की जाए तो अंचल की तीन लोकसभा सीटों पर पार्टी के नीतिनिर्धारक गहन चिंतन में लगे हुए है और विविध स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है। एक अच्छी बात यह है की अंचल की तीनों लोकसभा सीटों अर्थात ग्वालियर, भिंड और मुरैना में एक ही दिन वोट डाले जाएंगे,मतदान के लिए 12 मई की तारीख तय है।

 

फिलहाल अभी की स्थिति और विचार किया जाए तो ग्वालियर लोकसभा से पार्टी के वजनदार केंद्रीयमंत्री और वर्तमान सांसद नरेंद्र तोमर एकबार पुनः टिकिट की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे है। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान ग्वालियर से पार्टी के लिए जिस प्रकार के नतीजे सामने आए उसके बाद नरेंद्र तोमर के संगठनात्मक कार्य व्यवहार को लेकर असन्तोष देखने को मिला था। 

इस बात के भी संकेत मिले थे कि श्री तोमर अपनी ग्वालियर सीट के अलावा किसी अन्य जगह से मैदान में उतरने की इच्छा रखते हैं। लेकिन इसके बाद श्री तोमर ने ग्वालियर में जिस प्रकार की सक्रियता दिखाई और पार्टी के भीतर से  जिस तरह की खबरें सामने आ रही हैं उसे देखकर साफतौर पर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि श्री तोमर पर ही पार्टी एकबार फिर अपना दांव लगाने का मन बना चुकी है। 

 

श्री तोमर को अलग रखकर विचार किया जाए तो ग्वालियर से पूर्व में सांसदी का चुनाव जीत चुकीं प्रदेश सरकार में मंत्री रहीं वर्तमान शिवपुरी विधायक यशोधराराजे सिंधिया व पार्टी के फायरब्रांड नेता और पार्टी के केंद्रीय संगठन पर अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले जयभान सिंह का नाम भी चर्चा में है।लेकिन पार्टी उनपर दांव लगाएगी इसकी संभावना न के बराबर है। रही बात यशोधरा राजे की तो  महल से सम्बंध होने की वजह से निश्चित ही वे एक वजनदार प्रत्याशी हो सकती है लेकिन इन  नामों पर पार्टी यदि विचार करती है तो सबसे बड़ी समस्या यह होगी की श्री तोमर को कहा से चुनाव में उतारा जाय।  

उधर ग्वालियर से ही सटी हुई लोकसभा मुरैना की बात करें तो यहां से वर्तमान में अटलजी के भांजे अनूप मिश्रा सांसद हैं उन्हें पार्टी फिर से मैदान में उतारेगी इसपर जबरदस्त सन्देह है। जहांतक श्री मिश्रा की व्यक्तिगत परफॉर्मेंस का सवाल है उन्होंने हाल ही में भितरवार से विधानसभा के लिए भी अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन वे हार गए थे 2013 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। लगातार मिल रही हार ओर अटलजी के चले जाने के बाद  तथा दिल्ली में कमजोर होती पकड़ के कारण उनका ग्राफ तेजी से नीचे गया है। 

भिंड लोकसभा सीट की बात करें तो यहां से आईएएस रहे भागीरथ प्रसाद सांसद हैं चूंकि यह आरछित सीट है अतः पार्टी इसको लेकर बेहद गम्भीर दिखाई देती है। पार्टी सूत्रों से जिस तरह की खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक भागीरथ प्रसाद  को पुनः प्रत्याशी बनाए जाने की सम्भावना कम नजर आती है। इस दौड़ में फिलहाल मुरैना के महापौर अशोक अर्गल का नाम आगे बताया जा रहा है। कुछ लोग लाल सिंह आर्य को भी प्रत्याशी बनाये जाने के पक्ष में है। 

 

चूंकि चुनाव आयोग ने इन तीनों ही सीटों के लिए मतदान की तारीख 12 मई तय की है अतः इसमें अभी काफी वक़्त है यही वजह है कि प्रत्याशी चयन को लेकर भी पार्टी अभी उन लोकसभा सीटों को प्राथमिकता देगी जहां पहले वोट डाले जाएंगे अतः ग्वालियर भिंड मुरैना के लिए कैंडीडेट की घोषणा में देर हो सकती है। 

 

महत्वपूर्ण बात तो यह है कि अब पिछले लोकसभा चुनाव की तरह मध्यप्रदेश में  पार्टी के लिए स्थितियां उतनी अनकूल नहीं है। ऐसे हालात में ग्वालियर भिंड मुरैना की तीनों लोकसभा सीटों को पुनः कायम रखपाना भाजपा के नीतिनिर्धारकों के लिए कठिन अग्निपरीक्षा जैसा होगा।

 

 

 

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