बाबरी-राम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ज़मीन को रामलला विराजमान को देने का फ़ैसला सुनाया है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को अयोध्या में ही उचित जगह पर पांच एकड़ ज़मीन देने को कहा है.
रामलला विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील के. परासरन ने पैरवी की. परासरन की आयु इस समय 93 वर्ष है और वो अपनी युवा टीम के साथ सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम की पैरवी कर रहे थे.
9 अक्तूबर 1927 को तमिलनाडु के श्रीरंगम में पैदा हुए परासरन तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल रहने के अलावा भारत के अटॉर्नी जनरल भी रहे हैं. इसके अलावा वो साल 2012 से 2018 के बीच राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं.
परासरन को पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित किया जा चुका है.
परासरन ने क़ानून में स्नातक की पढ़ाई की. इस दौरान उन्हें हिंदू क़ानून की पढ़ाई के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था. पढ़ाई के बाद उन्होंने 50 के दशक में वकालत शुरू की.