ज्योतिर्विद बृजेन्द्र श्रीवास्तव

पूर्णिमा तिथि पर भद्रा होने के कारण होलिका दहन को लेकर देशवासी असमंजस में दिखाई दे रहे हैं क्योंकि ऐसा मत है की भद्रा में होलिका दहन निषेध है अथवा अशुभ फल देने वाला है । ऐसे हालात में होलिका दहन किस तारीख को करें लोग पशोपेश में दिख रहे हैं लोगों की परेशानियों का समाधान खोजने के लिए देश के जाने-माने ज्योतिर्विद बृजेंद्र श्रीवास्तव ने अपनी ज्योतिषीय गणना के आधार पर बताया है होलिका दहन पूजन सोमवार 6 मार्च को सम्पन्न करें
उन्होंने बताया की सोमवार की रात इस मङ्गल कार्य के लिए दो मुहूर्त हैं ।फाल्गुनी पूर्णिमा तिथि सोमवार 6 मार्च की शाम 4:47 बजे से मंगलवार की शाम 6.10 बजे तक है। पूर्णिमा के शुरू के आधे भाग में भद्रा सोमवार शाम 4:47 बजे से आरम्भ होकर सोमवार की रात व मंगलवार की सुबह के पहले 5 :13 बजे समाप्त होगी।जबकि सोमवार को भद्रा का मुख दो घण्टे का शाम 4:17 बजे से रात 6 17 बजे तक है।इस भद्रा मुख की समाप्ति के बाद होलिका दहन किया जा सकता है।
श्री श्रीवास्तव ने बताया सोमवार को ग्वालियर व निकटवर्ती क्षेत्रों में सूर्यास्त 6 20 बजे है। सोमवार 6मार्च को पूर्णिमा में पहला मुहूर्त: स्थानीय सूर्यास्त होने के बाद से रात्रि के प्रथम कालखण्ड अर्थात प्रदोष खण्ड में रात्रि 9 20 बजे तक है। सोमवार की देर रात्रि को ही दूसरा मुहूर्त सम्पूर्ण भद्रा की समाप्ति सुबह 5 13 होने के बाद परन्तु सूरज उगने के पहले होलिका दहन पूजन सम्पन्न करें। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार भी “प्रदोष व्यापिनी ग्राह्या पूर्णिमा फाल्गुनी सदा”।
तीसरा मुहूर्त मंगलवार 7 मार्च को* पूर्णिमा शाम 6 10 बजे तक होने से यह पूर्णिमा देश के केवलउन पूर्वी भागों में प्रदोष व्यापिनी है जहां सूर्यास्त 610 बजे के पहले हो पूर्णिमा में हो रहा है ऐसा बिहार उड़ीसा आदि पूर्वी भारत क्षेत्रमें संभव है इसलिए 7 मार्च केवल इन्हीं पूर्वी क्षेत्रों में होलिका दहन मुहूर्त संभव है। जबकि मप्र उप्र देहली आदि में व दक्षिण में कर्नाटक आदि क्षेत्रों में सोमवार6 मार्च को ही उक्त दो मुहूर्त में होली पूजन शास्त्र व तर्क सम्मत है। होली का रंग उत्सव तो होली पूजन व नवान्न अर्पण से ही आरम्भ हो जाता है व पंचमी तक चलता है इसलिए मङ्गलवार को और बुधवार को भी होली खेली जा सकती है। यह पर्व पड़वा प्रधान नहीं पूर्णिमा प्रधान है यह ध्यान रखना होगा।