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तानसेन समारोह :धर्मांतरण के इस काले अध्याय को सामने क्यों नहीं लाता म प्र का कला और संस्कृति विभाग

प्रवीण दुबे

ग्वालियर 12 दिसंबर 2025/ग्वालियर के विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक तानसेन की याद में प्रतिवर्ष दिसंबर में आयोजित किए जाने वाले तानसेन समारोह के उपलक्ष्य में  राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई आयोजन चल रहे हैं इसमें एक कार्यक्रम वादी संवादी नाम से भी आयोजित किया जाना है।  इस आयोजन में तानसेन और संगीत के विविध विषयों पर संवाद होता है। इस वर्ष भी यह परंपरागत आयोजन जारी है।

ऐसा लगता है कि स्थानीय प्रशासन से लेकर उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश सहित कला एवं संस्कृति विभाग ने तानसेन समारोह के अंतर्गत केवल तानसेन के संगीत पक्ष को ही याद रखा और तानसेन के जीवन से जुड़े तमाम अन्य पक्षों को पूरी तरह से नजरंदाज कर दिया गया है।

सबसे प्रमुख बात जिसमें कि एक बहुत बड़ा संदेश छुपा है उसे भी जैसे छुपाने की कोशिश की गई है।
यह प्रमुख बात है कि 15 वी शताब्दी के समय जब भारत में आक्रांता  बनकर मुगल शासक काबिज हुए तो उन्होंने विविध तरीकों से यहां धर्मांतरण का कुचक्र चलाया और तानसेन  जो कि एक ब्राह्मण कुल का था उसे भी तन्नू पांडे से मियां तानसेन बना दिया गया।
धर्मांतरण के इस कुचक्र के मुख्य सूत्रधार उस समय के झाड़ फूंक करने वाले मोहम्मद गौस को बनाया गया जिन्होंने पहले तानसेन के ब्राह्मण परिवार को झाड़ फूंक के सहारे प्रभावित किया और फिर बाद में मौके के फायदा उठाकर तानसेन जैसे उच्च प्रतिभाशाली संगीत कलाकार को जो कि कृष्ण भक्ति से प्रभावित था मुंह में झूठी सुपाड़ी डालकर धर्मांतरित करके मुसलमान बना डाला।

महान संगीतकार तानसेन की जन्मस्थली बेहट का वह शिवमन्दिर जो तानसेन की कर्मस्थली रहा

कुछ समय पूर्व देश में यह विषय बड़ी जोर शोर से उठा था कि भारत के मुसलमानों का डीएनए परीक्षण कराया जाय तो वह हिन्दू ही निकलेंगे यह बात भी लंबे समय से कही जाती रही है कि भारत के मुसलमानों की तीन चार पीढ़ियों पूर्व की जानकारी खंगाली जाए तो वह हिन्दू ही निकलेंगे ठीक उसी प्रकार जैसा कि तानसेन का प्रमाण हमारे सामने है।
मध्यप्रदेश के कला और संस्कृति विभाग को समझना चाहिए कि इस आयोजन के माध्यम से तानसेन का प्रमाण देकर इस बात का प्रचार किया जाए कि भारत में आए मुगल आक्रांताओं ने किस प्रकार यहां इस्लाम को फैलाने धर्मांतरण का कुचक्र चलाया और अकबर ने इसी कुचक्र में फंसाकर तानसेन को हिंदू से मुसलमान बनने के लिए मजबूर किया था। 

वादी-संवादी, लाइव चित्रांकन एवं प्रदर्शनी में भी यह पक्ष रहता है गायब

101 वें तानसेन संगीत समारोह में संगीत सभाओं के साथ-साथ अनुषांगिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके अंतर्गत राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में वादी-संवादी, समाधि स्थल पर तानसेन समारोह की प्रस्तुतियों पर एकाग्र लाइव चित्रांकन कार्यशाला एवं प्रदर्शनी, ललित कला महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा चित्र कार्यशाला एवं प्रदर्शनी, मध्यप्रदेश पर्यटन की गतिविधियां संयोजित की जा रही हैं।सबसे बड़ा सवाल तानसेन के विविध प्रसंगों पर मंथन के लिए आयोजित वादी संवादी कार्यक्रम  सहित चित्रांकन एवं प्रदर्शनी आदि  में तानसेन का धर्मानांतरण करके उन्हें मियां तानसेन बनाने के प्रसंग पर संवाद आदि क्यों नहीं किया जाता ? 

वरिष्ठ पत्रकार डॉ सुरेश सम्राट ने कहा हिंदू थे तानसेन

 

इस बारे में मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार लेखक डॉ सुरेश सम्राट से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि इतिहास की तमाम पुस्तकों में इस बात का उल्लेख है कि तानसेन का परिवार हिन्दू था तथा धर्मानतरण करके उन्हें मुस्लिम बनाया गया था डॉ सम्राट ने इसके लिए हरिहर द्विवेदी की पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि तानसेन हिन्दू थे इसका सबसे बड़ा प्रमाण उनकी जन्मस्थली का वह शिव मंदिर है जहां तानसेन का रियाज करते थे। डॉ सम्राट ने कहा कि तानसेन समारोह के समय इस प्रसंग पर भी संवाद होना चाहिए।

संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक श्री प्रकाश सिंह ठाकुर ने कहा  यह बात सही है
इस बारे में तानसेन समारोह  आयोजित करने वाली उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक श्री प्रकाश सिंह ठाकुर से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि तानसेन के जीवन से जुड़े विविध विषयों पर वादी संवादी जैसे कार्यक्रमों में संवाद होना चाहिए । उन्होंने कहा कि  इस तरह के सभी विषयों को समाविष्ट करने का प्रयास किया जाएगा उन्होंने कहा कि  स्थानीय प्रशासन और तानसेन समारोह समिति  तय करती है।
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