प्रवीण दुबे
ग्वालियर 12 दिसंबर 2025/ग्वालियर के विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक तानसेन की याद में प्रतिवर्ष दिसंबर में आयोजित किए जाने वाले तानसेन समारोह के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई आयोजन चल रहे हैं इसमें एक कार्यक्रम वादी संवादी नाम से भी आयोजित किया जाना है। इस आयोजन में तानसेन और संगीत के विविध विषयों पर संवाद होता है। इस वर्ष भी यह परंपरागत आयोजन जारी है।
ऐसा लगता है कि स्थानीय प्रशासन से लेकर उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश सहित कला एवं संस्कृति विभाग ने तानसेन समारोह के अंतर्गत केवल तानसेन के संगीत पक्ष को ही याद रखा और तानसेन के जीवन से जुड़े तमाम अन्य पक्षों को पूरी तरह से नजरंदाज कर दिया गया है।

महान संगीतकार तानसेन की जन्मस्थली बेहट का वह शिवमन्दिर जो तानसेन की कर्मस्थली रहा
वादी-संवादी, लाइव चित्रांकन एवं प्रदर्शनी में भी यह पक्ष रहता है गायब
101 वें तानसेन संगीत समारोह में संगीत सभाओं के साथ-साथ अनुषांगिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके अंतर्गत राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में वादी-संवादी, समाधि स्थल पर तानसेन समारोह की प्रस्तुतियों पर एकाग्र लाइव चित्रांकन कार्यशाला एवं प्रदर्शनी, ललित कला महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा चित्र कार्यशाला एवं प्रदर्शनी, मध्यप्रदेश पर्यटन की गतिविधियां संयोजित की जा रही हैं।सबसे बड़ा सवाल तानसेन के विविध प्रसंगों पर मंथन के लिए आयोजित वादी संवादी कार्यक्रम सहित चित्रांकन एवं प्रदर्शनी आदि में तानसेन का धर्मानांतरण करके उन्हें मियां तानसेन बनाने के प्रसंग पर संवाद आदि क्यों नहीं किया जाता ?
वरिष्ठ पत्रकार डॉ सुरेश सम्राट ने कहा हिंदू थे तानसेन

इस बारे में मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार लेखक डॉ सुरेश सम्राट से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि इतिहास की तमाम पुस्तकों में इस बात का उल्लेख है कि तानसेन का परिवार हिन्दू था तथा धर्मानतरण करके उन्हें मुस्लिम बनाया गया था डॉ सम्राट ने इसके लिए हरिहर द्विवेदी की पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि तानसेन हिन्दू थे इसका सबसे बड़ा प्रमाण उनकी जन्मस्थली का वह शिव मंदिर है जहां तानसेन का रियाज करते थे। डॉ सम्राट ने कहा कि तानसेन समारोह के समय इस प्रसंग पर भी संवाद होना चाहिए।
