ग्वालियर /मध्य प्रदेश हाई कोर्ट खंड पीठ ग्वालियर के न्यायमूर्ति श्री शील नागू एवं न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक की युगलपीठ ने एकल पीठ का आदेश निरस्त करते हुए व्यवस्था दी कि देश के किसी भी नागरिक को उसकी संपत्ति के उपयोग और उपभोग से वंचित नहीं किया जा सकता,और इसी के साथ पुलिस अधीक्षक भिंड को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को यदि कोई व्यक्ति उसकी खेती-बाड़ी करने से रोकता है तो उसे पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जावे।
ग्राम सोनी पुलिस थाना मेहगांव जिला भिंड निवासी श्रीमती कल्पना शर्मा ने अधिवक्ता अवधेश सिंह भदोरिया के माध्यम से एक रिट याचिका हाईकोर्ट में इस आशय की प्रस्तुत की कि गांव के ही कुछ दबंगों ने उसके पति की दिनांक 31.7.2020 को हत्या कर दी उसके बाद उसकी खेती बाड़ी पर कब्जा कर लिया आरोपीगण उसके परिवार को खेतीवाड़ी नहीं करने दे रहे हैं और खेतों में खड़ी फसल को काटने नहीं दे रहे हैं इसके संबंध में पुलिस तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को शिकायत की गई है किंतु कोई भी उसकी मदद नहीं कर रहा है हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिकाकर्ता की याचिका को यह कहकर खारिज कर दी कि यह मामला संपत्ति विवाद का मामला है इसलिए याचिकाकर्ता को सिविल न्यायालय में जाना चाहिए उक्त आदेश को याचिकाकर्ता द्वारा हाईकोर्ट की युगलपीठ मैं चुनौती दी गई और तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता का आरोपीगण से संपत्ति का कोई विवाद नहीं है जो वह सिविल न्यायालय में जाए ,उसे तो हत्या के आरोपीगण खेतीवाड़ी करने से रोक रहे हैं और फसल काटने से रोक रहे हैं और उसने तो पुलिस से सिर्फ पुलिस प्रोटेक्शन मांगा है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ का आदेश निरस्त करते हुए पुलिस अधीक्षक भिंड को आदेशित किया है कि याचिकाकर्ता यदि खेतीवाड़ी करने के लिए पुलिस प्रोटेक्शन की मांग करता है तो उसे पुलिस प्रोटेक्शन दिया जाए