सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, माओवादियों के सबसे मज़बूती सैन्य टुकड़ी बटालियन एक के कमांडर हिड़मा 2010 में 76 जवानों की मौत वाला दंतेवाड़ा हमला, 2013 में कांग्रेस नेतृत्व पर हुए हमले, 2017 और 2021 में सुरक्षाबलों पर हुए हमले में भी अहम हिस्सेदारी रही है.
सुकमा 17 नवंबर 2025/आंध्र प्रदेश पुलिस ने ख़ुफ़िया विभाग के एडिशनल डीजीपी महेश चंद्र लड्डा ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए माओवादी नेता माड़वी हिड़मा के मारे जाने की पुष्टि की है.
हिड़मा सीपीआई (माओवादी) के अहम चेहरा थे. 51 साल के हिड़मा पुलिस के लिए मोस्ट वॉन्टेड थे.
महेश चंद्रा लड्डा ने कहा कि हिड़मा के साथ उनकी पत्नी का भी शव बरामद हुआ है. लड्डा ने कहा कि मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के मारेदुमिली जंगल क्षेत्र में पुलिस के साथ एनकाउंटर में हिड़मा की मौत हुई.
पुलिस का कहना है कि आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू ज़िले के मारेदुमिली के पास मंगलवार सुबह 6 से 7 बजे के बीच सुरक्षाबलों और माओवादियों में मुठभेड़ शुरू हुई थी.
माड़वी हिड़मा पर केंद्र और कई राज्यों की सरकारों ने कुल एक करोड़ रुपये से भी ज़्यादा का इनाम रखा था और वह एनआईए की मोस्ट वॉन्टेड सूची में शामिल थे.
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, माओवादियों के सबसे मज़बूती सैन्य टुकड़ी बटालियन एक के कमांडर हिड़मा 2010 में 76 जवानों की मौत वाला दंतेवाड़ा हमला, 2013 में कांग्रेस नेतृत्व पर हुए हमले, 2017 और 2021 में सुरक्षाबलों पर हुए हमले में भी अहम हिस्सेदारी रही है.
हिड़मा 1996-97 में माओवादी संगठन से जुड़े थे. तब उनकी उम्र महज 17 साल थी. हिड़मा के दो और नाम भी हैं हिदमाल्लु और संतोष.
हिड़मा दक्षिण बस्तर इलाक़े में सुकमा ज़िले के पुवर्ती गाँव के रहने वाले थे.