नई दिल्ली 18 मार्च 2026/UGC के नए नियमों को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है, इसपर 19 मार्च को पुनः सुनवाई होना है उल्लेखनीय सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं के माध्यम से इन नियमों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। अब सभी की नजरें अदालत के आगामी फैसले पर टिकी हैं, जो उच्च शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
UGC नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं,ये हैं प्रमुख याचिकाकर्ता
नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में चल रहे विवाद के बीच मामला अब Supreme Court of India पहुंच गया है। इन नियमों के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें अलग-अलग याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न आधारों पर चुनौती दी है।
एक नहीं, कई हैं याचिकाकर्ता
UGC के 2026 के नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई एक मुख्य याचिकाकर्ता नहीं है, बल्कि अलग-अलग व्यक्तियों और समूहों ने स्वतंत्र रूप से याचिकाएं दायर की हैं।
प्रमुख याचिकाकर्ताओं में कौन-कौन शामिल
इन याचिकाओं में कुछ प्रमुख नाम सामने आए हैं—
मृत्युंजय तिवारी
Mrityunjay Tiwari बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता हैं। इन्होंने इस मामले में सबसे पहले प्रमुख याचिका दायर की।
मुख्य तर्क: UGC के नियम भेदभावपूर्ण हैं और समानता के सिद्धांत के खिलाफ जाते हैं।
एडवोकेट विनीत जिंदल
Vineet Jindal सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं और सामाजिक-वैधानिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं।
मुख्य मांग: भेदभाव की परिभाषा को “कास्ट-न्यूट्रल” बनाया जाए ताकि सभी वर्गों को समान सुरक्षा मिल सके।
राहुल दीवान
Rahul Dewan भी इस मामले में याचिकाकर्ता के रूप में सामने आए हैं।
मुख्य तर्क: नियमों में सामान्य वर्ग (General Category) के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई है।
अन्य याचिकाएं भी दाखिल
इनके अलावा कई अन्य याचिकाकर्ताओं—जिनमें छात्र, शोधार्थी और अधिवक्ता शामिल हैं—ने भी नियमों को चुनौती दी है।
उनका कहना है कि ये नियम:
अस्पष्ट (Vague) हैं
दुरुपयोग की संभावना रखते हैं
पृष्ठभूमि: 2019 की याचिका से जुड़ा मामला
इस पूरे मामले की जड़ 2019 में दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ी है।
इस याचिका को Radhika Vemula और Abeda Salim Tadvi ने दायर किया था।
उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की थी।
इसी के बाद UGC ने नए नियम लागू किए, जिन्हें अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है।