इस सवाल का जवाब देते हुए केंद्र के वकील ने कहा था कि अगर आईपीसी के तहत यह अपवाद समाप्त हो जाता है तो यह वैवाहिक बलात्कार के क्षेत्र को खोल देगा, जिसका भारत में अस्तित्व नहीं है. उन्होंने विवाह के उद्देश्य के लिये मुस्लिमों के बीच यौवनारंभ की उम्र की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा था कि संसद ने निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इन पहलुओं पर विचार किया है.
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि सिर्फ इसलिये कि इस अवैध प्रथा को कानूनी माना गया है और यह वर्षों से चल रही है इसलिये बाल विवाह इस तरह से नहीं चल सकता है. याचिकाकर्ताओं ने आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का इस हद तक उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग की है कि यह 15 और 18 साल के बीच की लड़की के साथ सिर्फ इस आधार पर यौन संबंध की अनुमति देता है कि वह विवाहित है.