Homeदेशनारी के बिना सशक्त समाज की परिकल्पना बेमानी

नारी के बिना सशक्त समाज की परिकल्पना बेमानी

समाजको आगे लाने की वाहक नारीशक्ति होती है उसके बिना एक सशक्त संमाज की परिकल्पना करना बेमानी है। जब नारी सबला होगी तभी समाज भी सबल होगा । यह बात सेवगाथा भोपाल की सम्पादिका श्रीमती विजय लछमी सिंह ने आज ग्वालियर के राष्ट्रोत्थान न्यास की तीन दिवसीय ज्ञान प्रबोधनी व्याख्यान माला के प्रथम दिन सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं की भूमिका विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कही।

उन्होंने कहा कि संगठित नारी शक्ति की देश को बेहद आवश्यकता है । श्रीमती सिंह ने कहा कि सबल समाज की नींव पुरुष नहीं नारी शक्ति ही होती है। ऊनोहने  देवी अहिल्या दुर्गावती कर्मावती जैसी तमाम महान नारियों द्वारा किये सेवा और शौर्य कार्यों का उदाहरण देते हुए आव्हान किया कि नारी शक्ति ऐसे सेवा कार्य के लिए आगे आए।

श्रीमती सिंह ने कहा कि मुग़लकाल में भारत की नारीशक्ति कमजोर कर दी गई तमाम कुप्रथाओं से वह जकड़ दी गई। इसका दुष्परिणाम समाज को झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब नारी पुरुष के साथ सहधर्मिणी होती है तभी देश सशक्त होता है।उन्होंने कहा कि नारी जब अशिक्षित और पिछड़ी होती है तो समाज का पतन होता है।

उन्होंने अपने सम्बोधन में सेवा भारती के माध्यम से नारीशक्ति द्वारा संचालित तमाम सफल सेवा प्रकल्पों की जानकारी दी और आव्हान किया की मातृ छाया व आरोग्यधाम जैसे सेवा प्रकल्पों के लिए नारी शक्ति आगे आये ।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह विभाग संघचालक प्रोफेसर राजेंद्र बांदिल राष्ट्रोत्थान न्यास के वरिष्ठ न्यासी वसंत कुण्ठे मंचासीन थे।

ज्ञानप्रबोधनी व्याख्यान माला के दूसरे दिन सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेशजी का व्याख्यान होगा।¸

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