जैसे जैसे चुनाव की बेला नजदीक आ रही शिवराज सरकार को निगम मण्डल आयोग और प्राधिकरणों में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों की याद भी आ गयी लगती है। चर्चा है कि मध्यप्रदेश सरकार कई वर्षों से खाली पड़े ग्वालियर ब्यापार मेला प्राधिकरण में शीघ्र अध्यक्ष की नियुक्ति करने जा रही है।
यहां बताना उपयुक्त होगा कि ग्वालियर के ब्यापार मेले को पूरे देश में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। यह मेला सिंधिया विरासत काल के समय से लगता आ रहा है और अब तक सौ वर्ष से भी अधिक का समय पूर्ण कर चुका है।
समय गुजरता गया लेकिन इस मेले का महत्व कभी कम नहीं हुआ। लेकिन वर्तमान की बात की जाय तो पिछले तीन चार वर्षों में यह मेला अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। बीते वर्ष तो आलम यह था कि यह मेला एक ग्रामीण हाट के स्वरूप को प्रदर्शित करता नजर आया ।
इतना सब होने के बावजूद मध्यप्रदेश शासन ने किसी काबिल जन प्रतिनिधि को इसकी कमान सोपने के बजाय नोकरशाही पर ज्यादा विश्वास करते हुए ग्वालियर के आयुक्त को इसका अध्य्क्ष बनाना अधिक उपयुक्त समझा। परिणामस्वरूप मेला एक वार्षिक सरकारी आयोजन की तर्ज पर संचालित कर खानापूर्ति की जाने लगी। पिछले वर्ष की दुर्दशा को लेकर शिवराज सरकार ग्वालियर वासियों व मीडिया के खासे निशाने पर रही और पार्टी नेताओं को काफी नीचा भी देखना पड़ा था।
अब जबकि कि चुनाव नजदीक है मध्यप्रदेश सरकार ग्वालियर मेला की दुर्दशा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है। यही वजह है कि ग्वालियर मेला प्राधिकरण में नियुक्ति को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक नियुक्ति को लेकर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की सत्ता और संगठन के शीर्ष नेताओं से चर्चा हुई है। पार्टी ने तय किया है कि इस वर्ष मेला प्रारंभ होने के पूर्व नियुक्ति कर दी जाय।
इसके लिए कई नाम चर्चा में है। सबसे प्रभावी रूप से जिस नाम की चर्चा है वह है वेदप्रकाश शिवहरे का,इनके अलावा आनन्द छापरवाल,अनुराग बंसल वेदप्रकाश शर्मा,समीक्षा गुप्ता जैसे नाम भी चर्चा में हैं। यह भी सम्भावना है कि इसके लिए कोई चमत्कृत कर देने वाला नाम भी सामने आ सकता है।