Homeदेशपश्चिम बंगाल से लेफ्ट का सफाया, राइट हो गए लेफ्ट वाले

पश्चिम बंगाल से लेफ्ट का सफाया, राइट हो गए लेफ्ट वाले

पश्चिम बंगाल में इस बार के लोकसभा चुनाव 2019 के दोपहर 12 बजे तक मिले रूझानों में लेफ्ट का पूरी तरह से सफाया हो गया। इससे पहले तक पश्चिम बंगाल को लेफ्ट का गढ़ माना जाता था मगर समय के साथ अब लेफ्ट समर्थक राइट में आ गए। वामपंथी अब रामभक्त हो गए और भाजपा में रूचि दिखाते नजर आ रहे हैं। शायद यही कारण है कि इस लोकसभा चुनाव में इनके समर्थकों का मन बदला और वो भाजपा के कमल को पसंद करने लगे हैं।

इस बार के चुनाव में बंगाल भगवा उभार देख रहा है क्योंकि भाजपा यहां कई सीटें जीतती दिख रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ अंतर को तेजी से कवर कर रही है। राज्य की 42 सीटों में से 23 पर तृणमूल आगे है; बीजेपी 17 पर आगे है।

यह तृणमूल नहीं, बल्कि भाजपा है, जिसे वामपंथियों से लाभ मिला है, जो राज्य में तीन दशक की सत्ता के बाद 2012 में सत्ता गंवा चुकी है, विश्लेषकों का कहना है कि वामपंथियों का वोट प्रतिशत 6 प्रतिशत बीजेपी को जा रहा है। इसी वजह से इस बार के चुनाव में उनको अधिक सीटें मिल रही है।

2014 में, भाजपा ने राज्य में सिर्फ दो सीटें जीती थीं। तब से, पार्टी ने कड़ी मेहनत से चुनाव प्रचार किया, जिसका नतीजा दिख रहा है। पिछले दो वर्षों में, जमीन पर भाजपा के प्रयासों ने राज्य सरकार के साथ कई टकरावों को देखा, विशेष रूप से धार्मिक आयोजनों पर आयोजित रैलियों और मार्च, और “जय श्री राम” के मंत्रों के साथ पारंपरिक “माँ दुर्गा” का मुकाबला किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल में सबसे ज्यादा रैलियों को संबोधित किया। जबकि पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री को “स्पीड-ब्रेकर दीदी” के रूप में करार दिया, ममता बनर्जी ने उन्हें “एक्सपायरी बाबू” कहकर प्रतिशोध लिया, यह कहते हुए कि उन्होंने पीएम मोदी को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि भाजपा सरकार अपनी समाप्ति की तारीख की तरफ बढ़ रही है।

साल 2014 के चुनाव के भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि भाजपा का स्वर्ण काल शुरू हो गया है। भाजपा नेता अमित शाह ने कहा था कि अब केरल और पश्चिम बंगाल में फोकस किया जाएगा, उनके इस बयान के बाद अब केरल तो नहीं मगर पश्चिम बंगाल में स्वर्ण काल जरूर दिख रहा है। भाजपा ने यहां लेफ्ट के खाते में जाने वाली सभी सीटें अपनी तरफ खींच ली।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब तक मुख्य धारा से दूर रही भाजपा ने लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी ने साल 2014 में केवल दो महत्वपूर्ण दार्जिलिंग और आसनसोल सीट पर जीत ही नहीं हासिल की बल्कि तीन अन्य सीट कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर और मालदा दक्षिण में दूसरे स्थान पर रही। उस चुनाव में कुल मिलाकर पार्टी को यहां पर 17 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिला, जो अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले 1991 में 13 प्रतिशत वोट प्राप्त हुआ था। 2009 लोकसभा चुनावों में पार्टी को 6.15 प्रतिशत वोट हासिल हुआ था। पार्टी ने एक समय पश्चिम बंगाल की बड़ी ताकत वाम मोर्चे के वोट आधार में सेंध लगाकर तीसरा स्थान हासिल किया है।

पार्टी का राज्य और केंद्रीय नेतृत्व 2016 विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के साथ निकट की लड़ाई के लिए अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। उस दौरान भी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यदि भाजपा यही रफ्तार बरकरार रखती है तो पार्टी राज्य में चार दशक पुराने राजनीतिक समीकरणों में उलटफेर कर सकती है। इस बार के लोकसभा चुनाव के शुरूआती रिजल्ट से मिले नतीजों से ये बात पूरी सही साबित हो रही है।

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