संपादकीय:प्रवीण दुबे
बांग्लादेश में लगभग सवा करोड़ हिंदुओं के ऊपर लगातार अत्याचार का सिलसिला जारी है, ऐसी स्थिति में उस देश के साथ भारत की किसी भी मनोरंजनात्मक गतिविधि से देश विदेश में निवासरत करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
कमोवेश ऐसी ही स्थिति आगामी 6 अक्टूबर को बांग्लादेश के साथ ग्वालियर में होने जा रहे टी20 मैच को लेकर देखने को मिल रही है।
ग्वालियर अंचल में बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो बांग्लादेश के साथ होने वाले इस मैच के आयोजन को लेकर नाखुश हैं।
सोशल मीडिया पर तो इस मैच के व्यक्तिगत बहिष्कार के स्लोगन हजारों की संख्या में देखने को मिल रहे हैं।
देश के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में शामिल हिंदू महासभा ने तो बांग्लादेश को ग्वालियर में नहीं खेलने देने की धमकी तक दे डाली है।
इस मैच में बांग्लादेश की सहभागिता का विरोध करने वालों का कहना है जब बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के रहते हिंदुओं के धार्मिक स्थलों और महिलाओं पर हिंसाचार लगातार जारी है।
इतना ही नहीं बांग्लादेश द्वारा भारत से निर्वासित कट्टर दुश्मनों में शामिल जाकिर नाईक को शरण दे दी गई है साथ ही आने वाली दुर्गा पूजा के दौरान वहां हिंदुओं को दुर्गा पंडाल न लगाए जाने के फरमान जारी कर दिए गए हैं
ऐसी स्थिति में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को बांग्लादेश के साथ क्रिकेट मैच नहीं खेलकर वहां के करोड़ों हिंदुओं को लगातार टार्गेट करने के कृत्य का प्रतीकात्मक विरोध करने का संदेश देना चाहिए था ।
हालांकि देश में बांग्लादेश टीम के क्रिकेट खेलने का समर्थन करने वाले एक वर्ग की दलील है कि जब भारत सरकार बांग्लादेश की भगोड़ी राष्ट्रपति को शरण क्यों दिए हुए है ? शायद यह तर्क देने वाले भारतीय संस्कृति की उन मान्यताओं को भूल रहे हैं जिनके अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति अपनी जान की रक्षा के लिए शरण में आता है तो उसे आश्रय दिया जाना हमारी परंपरा में शामिल है।
लेकिन इसका कदापि यह मतलब नहीं कि हम उस देश में हिंदुओं पर जारी हिंसा को भूल उसके साथ क्रिकेट मैच जैसी मोरंजनात्मक गतिविधि को स्वीकार करें।

इस मामले में भारत सरकार को भी बांग्लादेश के खिलाफ भारत के करोड़ों हिंदुओं के आक्रोश को दृष्टिगत रखकर फिलहाल किसी भी खेल गतिविधि से परहेज करने का निर्णय लेना चाहिए था ।
अफसोस की बात है कि ने तो भारत सरकार और न ही बीसीसीआई ने इस ओर कोई ध्यान दिया ।
एक तरफ बांग्लादेश से प्रतिदिन हिंदुओं पर हिंसाचार के चलते उनकी सिसकियां सुनाई दे रही हैं तथा मंदिर तोड़ने आगजनी आदि की हृदय विदारक तस्वीरें सामने आ रही हैं तो दूसरी ओर भारत में उसी देश के खिलाड़ियों के साथ भारतीय टीम छक्के चौक्कों पर हर्षित होती दिख रही है।
जरा सोचिए मैदान पर यह दृश्य देखकर चीत्कार करते बांग्लादेश के हिंदुओं के ऊपर क्या गुजर रही होगी क्यों कि पूरी दुनिया में उनको यदि किसी से सहारे और समर्थन की आस है तो वह एकमात्र हिंदुस्तान ही है दूसरा कोई नहीं।
जहां तक ग्वालियर में मैच के आयोजन को लेकर जारी विरोध पर ग्वालियर से तालुक्कात रखने वाले बड़े नेताओं की चुप्पी भी आश्चर्य में डालने वाली कही जा सकती है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तो सीधे इस आयोजन को सफल बनाने के लिए दिनरात एक करते दिखाई दे रहे हैं
अचंभा तो तब हुआ जब भारी बारिश से बेहाल ग्वालियर वासियों की परेशानियों पर मरहम लगाने से अधिक उन्होंने क्रिकेट मैदान पर भरे नाले के पानी की चिंता की और पूरे प्रशासनिक अमले को उस ओर डायवर्ट कर दिया। उन्हे न तो बाढ़ पीड़ितों के आश्रय स्थलों का ध्यान आया न शहर की खंदक नुमा स्वरूप ले चुकी सड़कों की याद आई।
उधर ग्वालियर से जुड़े दूसरे सबसे बड़े नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर तो पूरी तरह ग्वालियर में इस मैच को लेकर लगातार उठ रहे विरोध के स्वरों को लेकर अनभिज्ञ ही बने हुए हैं।
कहा यह जा रहा है कि श्री सिंधिया का बांग्लादेश मैच को सफल बनाने में लगाई जा रही पूरी ताकत और नरेन्द्र सिंह सहित पूरी की पूरी भाजपा के मूक दर्शक बने रहने के पीछे एक बड़ा कारण बीसीसीआई के अध्यक्ष पद की कमान जयंत शाह के हाथों होना है।
चूंकि जयंत शाह भाजपा के नंबर दो कहे जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शहजादे हैं साथ ही सिंधिया का गुजरात कनेक्शन जो कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह तक सीधे जाता है। यही कारण है कि बांग्लादेश टीम और इस आयोजन के प्रति लाख आक्रोश को नजर अंदाज किया जा रहा है और बांग्लादेश के सिसकते हिंदुओं के दर्द को दरकिनार कर छक्के चौक्कों की महफिल सजाने ग्वालियर तैयार है।
Praveen dubey@ shabd shakti news