हमारी सत्य सनातन हिन्दू संस्कृति में कहा गया है ” रुग्ण मानवता। की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं” इस सत्य को साकार करने अनेक लोगों ने अपना पूरा जीवन लगा दिया,अनेक ऐसी संस्थाएं संगठन भी इस देश में मौजूद हैं जो नर सेवा नारायण सेवा के बोधवाक्य को कृतिरुप में चरितार्थ कर रहे हैं। हाल ही के कोरोनाकाल के समय तमाम ऐसे लोग व संगठन पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन गए जिन्होंने बीमार मानवता की सेवा करते करते अपने प्राण तक दे दिए। आज मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर में भी रूग्ण मानवता की सेवा के लिए कुछ खास प्रसंग घटित होने जा रहा है। इस प्रसंग की चर्चा आज इस कारण जरूरी है क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इसमें खास रूचि है और उनका आज का ग्वालियर प्रवास इसी उद्देश्य को दृष्टिगत रखकर होने जा रहा है। उद्देश्य वही जिसका हमने पहले ही जिक्र किया है ” रूग्ण मानवता की सेवा ” इस काम को खुद करना या फिर इसके लिए समय निकालना अथवा जो लोग भी यह काम कर रहे हैं उनका मनोबल बढ़ाना फिर किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री यह करे तो निश्चित ही यह बड़ी खबर है और इसकी जितनी ही प्रशंसा की जाए कम है। जैसी की हमें जानकारी है उसके मुताबिक मुख्यमंत्री की आज की ग्वालियर यात्रा को उन्होंने खुद अपनी ओर से सिर्फ इस कारण मंजूरी दी क्यों की उनसे रुग्ण मानवता की सेवा में रत एक ऐसे प्रकल्प के कार्यक्रम में आने को कहा गया जिससे कहीं न कहीं शिवराज सिंह का शुरुआत से ही व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है साथ ही जो पिछले 11
वर्षों में रुग्ण मानवता की सेवा के क्षेत्र में न केवल एक मिसाल बन चुका बल्कि इस सेवाभावी प्रकल्प ने यह भी सिद्ध कर दिखाया है की यदि इरादे पक्के हों और उद्देश्य अच्छा हो तो समाज सदैव सहयोग के लिए तत्पर रहता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह यूं तो रविवार की अपनी ग्वालियर यात्रा में कई सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होंगे लेकिन इस यात्रा में वे ग्वालियर के आरोग्यधाम अस्पताल के 11 वें स्थापना दिवस समारोह में भी मुख्य अतिथि होंगे। आज से ठीक ग्यारह वर्ष पूर्व की बात करें तो किसी ने सोचा भी नहीं था की केवल एक सेवाभावी व्यक्ति की सोच इतना विराट रूप भी ले सकती है। यह व्यक्ति कौन था ? वह थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले अनिल जी ओक वर्तमान में वे संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख हैं। लेकिन 11 वर्ष पहले वे विभाग प्रचारक के दायित्व पर ग्वालियर में नियुक्त थे। इसी दौरान संघ की नर सेवा नारयण सेवा की प्रेरणा स्वरूप उनके मन में एक अच्छे अस्पताल के सर्वसुविधायुक्त सेवा प्रकल्प की शुरुआत करने की बात ने जन्म लिया। यह कहां से शुरू हो ? तो सर्वप्रथम संघ कार्यालय के खाली पड़े एक स्थान पर छोटे रूप में इसकी शुरूआत की गई आगे जाकर बड़े अस्पताल निर्माण के लिए समाज के सहयोग की योजना बनी तय किया गया शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व पर आधारित विश्व प्रसिद्ध नाटक जाणता राजा का मंचन कराया जाए। निर्माता बाबा साहब पुरंदरे ने अस्पताल निर्माण के लिए सहयोग राशि एकत्रित करने की नेक बात सुनी तो सहर्ष राजी हो गए। नाटक का मंचन हुआ शहरवासियों ने जमकर सहयोग किया अन्य शहरों में व पुनः ग्वालियर में इसके मंचन ने श्री ओक के सेवा प्रकल्प को खड़ा करने आर्थिक बल दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सहयोग से स्थान आवंटित हुआ कार्य शुरू हुआ बहुत ही कम राशि पर जांचे व बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से अस्पताल ने शहरवासियों के दिल में शीघ्र जगह बना ली सेवा की सोच से उपजा एक छोटा सा बीज सर्वसुविधायुक्त बड़े अस्पताल के रुप में बटवृक्ष बनकर समाज के सामने खड़ा है। आज से ग्यारह वर्ष पूर्व राष्ट्रोत्थान न्यास भवन में जब इस सेवा प्रकल्प (अस्पताल) का शुभारंभ हुआ था उस समय भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह। ही मुख्य अतिथि थे और आज जब यह प्रकल्प विराट रूप ले चुका है तो शिवराज भला कैसे नहीं आते।
