देवशयनी एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष माना गया है। इस दिन चातुर्मास आरंभ होता है। भगवान विष्णु इस तिथि से चार मास के लिए योग निद्रा में लीन हो जाएंगे। इसलिए आषाढ़ मास की इस तिथि को देवशयनी एकादशी कहा गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु जब योगनिद्रा में रहते हैं तो विश्व का कार्यभार शिव जी संभालते हैं। देवशयनी एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करनी चाहिए इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम राम रक्षास्त्रोत्र का पाठ करने से सुख समृद्धि का वास होता है।
पंचाग के अनुसार 10 जुलाई रविवार से आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी की आरंभ हो रही है। एकादशी का व्रत रखने व देव शयनी एकादशी व्रत का पारण यानी समापन 11 जुलाई सोमवार को द्वादशी तिथि को किया जाएगा। महाभारत की कथाओं में मिलता है कि भगवान श्री कृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर और अर्जुन को इसके बारे में विस्तार से बताया था।
धर्मराज भगवान श्री कृष्ण के कहने पर एकादशी व्रत को विधिवत धारण और पारण किया था। देवशयनी एकादशी की तिथि चातुर्मास के आरंभ होगा। चातुर्मास में देवताओं का शयन काल आरंभ होगा। जिस कारण मांगलिक और शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। चातुर्मास का समापन देवउठनी एकादशी पर होगा जिसका मान दीपावली के बाद पड़ने वाले का एकादशी को होगा।