प्रवीण दुबे
भाजपा हाई कमान द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मध्यप्रदेश में कई सिंधिया समर्थक नेताओं के टिकट काटे जाने का संकेत मिलने के बाद सिंधिया समर्थक नेताओं में जमकर खलबली मची हुई है।
मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने का ख़्वाब देख रहे कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्गविजय सिंह ने इस बात को संज्ञान में लेते हुए सिंधिया समर्थकों की घर वापसी का प्रयास तेज कर दिया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए परेशानी की बात यह है कि उनके समर्थकों को लेकर कांग्रेस द्वारा चलाया जा रहा घर वापसी अभियान को अच्छी खासी सफलता मिलती दिखाई दे रही है। बीते दो महीने में तीन कट्टर सिंधिया समर्थक नेता बीजेपी छोड़ चुके हैं।

ताजा घटनाक्रम की बात करें तो जिस समय सिंधिया गुरुवार को संसद में कांग्रेस पर हमलावर थे उसी समय कट्टर सिंधिया समर्थक नेता माने जाने वाले रघुराज सिंह धाकड़ ने बीजेपी का दामन छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।
रघुराज सिंह धाकड़ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में 2020 में कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था और बीजेपी में शामिल हो गए थे।
जैसी की जानकारी मिल रही है श्री धाकड़ की कांग्रेस में घर वापसी के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे और राघौगढ़ से विधायक जयवर्धन सिंह का बड़ा हाथ माना जा रहा है।
रघुराज सिंह धाकड़ गुरुवार को बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ कोलारस से भोपाल के लिए रवाना हुए थे।
रघुराज सिंह धाकड़ ने पहले पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे और राघौगढ़ से विधायक जयवर्धन सिंह से मुलाकात की थी। जयवर्धन सिंह ही नेताओं को सदस्यता दिलाने के लिए कमलनाथ के आवास पर लेकर पहुंचे थे।
रघुराज सिंह धाकड़ शिवपुरी के कद्दावर नेता माने जाते हैं और उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है।
उधर भाजपा के भीतर से जिस प्रकार के संकेत मिल रहे हैं उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि आने वाले समय में कई और सिंधिया समर्थक नेता अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं ।सूत्रों की माने तो ग्वालियर चंबल संभाग मैं सिंधिया समर्थक कई नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ गोविंद सिंह जैसे नेताओं के लगातार संपर्क में बने हुए हैं।
सिंधिया के गढ़ माने जाने वाले ग्वालियर की बात करें तो 2020 में यहां से बड़ी संख्या में सिंधिया के साथ उनके समर्थक भाजपा में शामिल हुए थे।
उस दौरान सिंधिया ने दबाव की राजनीति करते हुए अपने समर्थकों को ना केवल टिकट दिलाया था बल्कि मनमाफिक मंत्री पद व कई अन्य संगठनात्मक पदों पर आसीन करा दिया था।
इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं में बेचैनी और नाराजी देखी जा रही थी चूंकि अब चुनाव सर पर हैं और शिवराज सिंह सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी सर चढ़कर बोल रही है ऐसी स्थिति में भाजपा हाई कमान ने नाराज कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने के लिए तमाम सिंधिया समर्थकों पर लगाम लगाने का मन बना लिया है।
सूत्रों की माने तो पिछली बार जिन सिंधिया समर्थक नेताओं को दबाव की राजनीति के चलते भाजपा ने टिकट दिया था इस बार उनमें से कई नेताओं के टिकट पार्टी काट सकती है।
इस बात को लेकर सिंधिया समर्थक विधायकों नेताओं और मंत्रियों में खासी खलबली मची हुई है क्योंकि इस बार माहौल शिवराज सरकार के खिलाफ नजर आ रहा है ऐसी स्थिति में सिंधिया समर्थक खुद को तवज्जो न दिए जाने के कारण कांग्रेस में वापसी की खिचड़ी भी पका रहे हैं।उधर भाजपा की इस अंदरूनी कमजोरी का लाभ उठाने के लिए कांग्रेस ने ग्वालियर चंबल संभाग में अपने पूरे घोड़े खोल दिए हैं पिछले कुछ समय में कई सिंधिया समर्थकों द्वारा कांग्रेस में जाने का क्रम लगातार बढ़ता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है की मध्य प्रदेश में जिस प्रकार का माहौल बनता दिखाई दे रहा है उसे देखकर ऐसा लगता है की कई खाटी सिंधिया समर्थक नेता जिनमें तकरीबन 2 से 3 मंत्रियों के नाम भी शामिल है कांग्रेस में जा सकते हैं देखना दिलचस्प होगा की चुनावी सरगर्मियों इस महत्वपूर्ण समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके खिलाफ जारी कांग्रेसी अभियान और उनकी अपनी पार्टी के भीतर तवज्जो न मिलने के घटनाक्रम से किस प्रकार निपटते हैं।