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भारत बंद से किसान संघ ने किया किनारा, कानून वापसी के बजाय संशोधन का समर्थन

लखनऊ: भारतीय किसान संघ ने किसानों संगठनों के भारत बंद का समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। किसान संघ का कहना है कि वह राजनीति प्रेरित आंदोलन व कार्यक्रमों से जुड़कर काम नहीं करता है। कानून में संशोधन कराने के लिए वह अपने अहिंसावादी तरीके से काम कर रहे हैं।

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने  कहा है कि कृषि कानूनों में सुधार के लिए भारत बंद व पुरस्कार वापसी कार्यक्रम का ऐलान करने वाले किसान संगठनों के साथ हमारा संगठन नहीं है। हमारा संगठन अहिंसात्मक तरीके से समाज में जागरुकता लाने व बदलाव के लिए कार्य करता है। देश के बीस हजार गांवों से किसानों के प्रस्ताव तैयार कराकर भारतीय किसान संघ ने केंद्र सरकार को सौंपे हैं। किसानों की आकांक्षा और अपेक्षा के अनुरूप कानून बने इसके लिए हमारे संगठन ने सभी सांसदों को अपनी ओर से प्रस्ताव पत्र दिए हैं। कानून बनाने वाले सांसदों को संवेदनशील बनाकर हम कानून में बदलाव लाना चाहते हैं। भारत बंद या किसी अन्य तरीके से हम लोग देश की जनता को मुश्किल में नहीं डालने वाले हैं। दिल्ली के बाहर डेरा डाले किसान संगठनों को भारतीय किसान संघ का समर्थन भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि हम ऐसे तरीकों को पसंद नहीं करते। ऐसे आंदोलन जो राजनीतिक कारणों से किए जा रहे हैं। उकसावे में काम करने वालों से हमारा संगठन दूर रहता है। ऐसे आंदोलनों का अंत मंदसौर आंदोलन जैसा होता है जिसका फायदा उठाकर कुछ लोग नेता-मंत्री बन जाते हैं। हमारा संगठन देशव्यापी है। हम सरकार के कानून का विरोध कर रहे हैं। हम लोगों ने साढ़े चार सौ जिलों से सरकार को ज्ञापन भिजवाए हैं। हम लोग अहिंसक तरीके से काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार अपने कानून में संशोधन करेगी। जिससे किसानों का भला होगा।

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सांसदों को सौंपे हैं कानून में संशोधन के प्रस्ताव

भारतीय किसान संघ ने देश के सभी सांसदों को कृषि कानूनों में संशोधन के लिए प्रस्ताव सौंपे हैं। हालांकि संघ ने यह प्रयास कानून बनने से पहले ही किया था तब संघ की बात केंद्र सरकार ने नहीं सुनी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को किसान संघ की ओर से मांग पत्र सौंपने वाले ब्रज प्रांत के अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने बताया कि सांसदों को सौंपे गए प्रस्ताव पत्र में संघ ने मांग की है कि एमएसपी को अनिवार्य किया जाए। किसी भी संस्था अथवा व्यापारी के लिए अनिवार्य हो कि वह अनाज की खरीद एमएसपी पर ही करे।

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इसके अलावा किसानों व खेती से संबंधित विवादों का निपटारा करने के लिए जिला स्तर पर न्यायालय की व्यवस्था हो जहां केवल कृषि विवाद ही सुने जाएं। अनाज की खरीद करने वाले सभी व्यापारियों का सरकार के पास पंजीकरण अनिवार्य हो। उनकी बैंक गारंटी भी हो जिससे वह किसानों के साथ धोखाधड़ी न करने पाएं।

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