प्रवीण दुबे
ग्वालियर का तानसेन संगीत समारोह सौ वर्ष से अधिक पुराना हो चुका है इस वर्ष इसका 101 वां आयोजन है और मध्यप्रदेश की कला और संगीत अकादमी पूरी भव्यता के साथ इसे आयोजित कर रही है इस ऐतिहासिक संगीत समारोह को लेकर कुछ नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं। तानसेन समारोह से जुड़ी महफिलों को अब ग्वालियर से बाहर अन्य शहरों में भी सजाया जा रहा है,इसका समय भी बढ़ाया गया है,तानसेन की समाधि से इतर भी संगीत सभाएं हो रही हैं।

लेकिन इन सब नये प्रयोगों के बीच एक प्रयोग ऐसा भी किया गया है जिसको लेकर ग्वालियर के शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के बीच जोरदार चर्चा है। विशुद्ध शास्त्रीय संगीत की राग रागनियों पर आधारित इस समारोह में बॉलीवुड सूफी गायिका जसपिंदर नरुला के कार्यक्रम को लेकर बहुत सारे संगीत प्रेमी थोड़ा असहज से दिखाई दे रहे हैं
उनकी योग्यता पर किसी को कोई गुरेज नहीं है लेकिन जिस प्रकार की चर्चाएं हैं उनके मुताबिक तमाम शास्त्रीय संगीत प्रेमी जसपिंदर नरुला को
मुख्यतः फिल्म और एल्बम आधारित गायिका मानते हैं उनका कहना है कि चूंकि शुद्ध शास्त्रीय परंपरा में उनका योगदान सीमित है अतः शुद्ध शास्त्रीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाली तानसेन संगीत समारोह में उनके गायन को सही नहीं ठहराया जा सकता है। यह तो शास्त्रीय संगीत में बॉलीवुड गायिकी की मिलावट जैसा है जिसे भीड़ जुटाने या मनोरंजन करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
पिछले कई दशकों से तानसेन समारोह का नजदीकी से कवरेज करते रहे वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल से इस बारे में चर्चा की तो उन्होंने कहा कि देश में कुछ गिने चुने आयोजन ऐसे हैं जो विशुद्ध रूप से शास्त्रीय संगीत पर आधारित हैं ऐसे तानसेन समारोह उनमें सबसे प्रमुख है उसके मूल स्वरुप को बदलना ठीक नहीं है पहले विदेशी कलाकारों को यहां बुलाया गया और इसबार उस गलती को सुधारा गया तो बॉलीवुड सूफी गायिका को आमंत्रित कर लिया गया यह उचित नहीं है इससे भीड़ भले एकत्रित हो जाए शास्त्रीय संगीत प्रेमी तो दूर ही जाएंगे।
उधर मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय कार्यपरिषद सदस्य चंद्रप्रताप सिंह ने कहा कि आयोजकों ने संख्या बढ़ाने की दृष्टि से यह प्रयोग किया है।
इस बारे में मध्यप्रदेश संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि सरकार सदैव ऐसे आयोजनों का मूल स्वरुप कायम रहे इस दिशा में कार्य करती है। उन्होंने कहा कि व्यापक विचार विमर्श के बाद इनका कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने कहा वडाली बंधु हंसराज हंस ऋचा शर्मा चंदन दास ये सभी सूफ़ी, गजल और भजन गायक हैं जो कि तानसेन समारोह से एक दिवस पूर्व आगाज ग़मक में प्रस्तुति दे चुके हैं।
आज गयेंगी बॉलीवुड सूफ़ी गायिका जसपिंदर नरूला
उल्लेखनीय है कि 101वाँ तानसेन समारोह की पूर्व संध्या पर पारम्परिक गमक संगीत सभा का आयोजन आज 14 दिसम्बर, 2025 को इंटक मैदान, ग्वालियर में किया जा रहा है। इस संगीत सभा में सुविख्यात गायिका सुश्री जसपिंदर नरूला, मुम्बई का सूफी गायन होगा। यह संगीत सभा सायं 6:30 बजे से प्रारंभ होगी।