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वीडियो :भोपाल के तात्या टोपे स्टेडियम में दिखाई दिया श्रेणी मिलन पथ संचलन का भव्य दृश्य,ग्वालियर में भी 29 स्थानों से निकले संचलन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर श्रेणी मिलन पथ संचलन : एकता, समरसता और राष्ट्रभाव का भव्य प्रतीक

ग्वालियर में भी 29 स्थानों से उत्साह के साथ निकले पथ संचलन

भोपाल/ ग्वालियर/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आज तात्या टोपे स्टेडियम, भोपाल में श्रेणी मिलन पथ संचलन का भव्य दृश्य देखने को मिला। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भोपाल विभाग द्वारा संयोजित किया गया।

स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियां, घोष का वादन और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत युवाओं ने सम्पूर्ण वातावरण को प्रेरणादायी बना दिया।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश माननीय रोहित आर्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सह-क्षेत्र प्रचारक श्री प्रेमशंकर ने मुख्य वक्ता के रूप में संघ के कार्य, उद्देश्य और समाज में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत उद्बोधन दिया। मंच पर प्रांत संघचालक माननीय अशोक पांडे, विभाग संघचालक माननीय सोमकांत उमालकर उपस्थित रहे।

इस अवसर पर चिकित्सा, शिक्षा, विधि, प्रशासन, उद्योग, कृषि, कला, खेलकूद तथा मातृशक्ति सहित समाज के विविध वर्गों से जुड़े तीन हजार से अधिक स्वयंसेवकों की सहभागिता रही। तात्या टोपे स्टेडियम स्वयंसेवकों के अनुशासित संचलन, दंड, योगासन और घोष की स्वर लहरियों से गूंज उठा। सुसज्जित गणवेश में सुसंगठित स्वयंसेवकों की श्रेणियां जब एक स्वर में कदमताल करती हुई आगे बढ़ीं, तो यह दृश्य राष्ट्र की एकता, अनुशासन और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक बन गया।

*संघ स्थापना का उद्देश्य और प्रेरणा*

मुख्य अतिथि श्री रोहित आर्य ने समाज में संघ की यात्रा, उसके कार्यों और नागरिक शिष्टाचार एवं सामाजिक समन्वय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने कार्यों के माध्यम से समाज में अनुशासन, आत्मीयता और राष्ट्रीय एकता की भावना को सशक्त किया है।

मुख्य वक्ता श्री प्रेमशंकर जी ने अपने उद्बोधन में पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा संघ की स्थापना के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ का जन्म केवल संगठन खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र को संगठित, समर्थ और संस्कारित बनाने के संकल्प से हुआ। उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार जी ने अनुभव किया कि देश की अनेक समस्याओं की जड़ समाज की विखंडित चेतना में है, इसलिए उन्होंने संगठन के माध्यम से व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण का कार्य आरंभ किया। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र तक के निर्माण का सतत प्रवाह है।

*गुरुजी के आदर्शों की चर्चा*

अपने वक्तव्य में श्री प्रेमशंकर जी ने द्वितीय सरसंघचालक परम पूज्य माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ की जीवन दृष्टि और उनके नेतृत्व में संघ के विस्तार पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने संघ को मात्र संगठन नहीं, बल्कि एक जीवंत राष्ट्रशक्ति के रूप में स्थापित किया। उनके नेतृत्व में संघ का कार्य शिक्षा, संस्कृति, ग्रामविकास और सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में फैल गया, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग तक संगठन की भावना पहुँची।

*समरसता और पंच परिवर्तन के सूत्र*

वक्ताओ ने अपने उद्बोधन में कहा कि समरसता और एकजुटता ही राष्ट्र की शक्ति का आधार हैं। संघ सिखाता है कि समाज का कोई भी अंग छोटा या बड़ा नहीं होता; सभी का समान सम्मान और सहभागिता ही सच्ची समरसता का प्रतीक है। उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व इन पाँच स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहा है।

इस प्रकार, श्रेणी मिलन पथ संचलन ने न केवल संघ की अनुशासन और संगठन की परंपरा को उजागर किया, बल्कि राष्ट्रभाव, एकता और समरसता के उस आदर्श को भी सजीव किया, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की भावना के केंद्र में है।

उल्लेखनीय है कि आज एक ही दिन में भोपाल विभाग में चालीस से अधिक पथ संचलन आयोजित हुए, जिनमें हजारों स्वयंसेवकों ने कदमताल करते हुए सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की।

ग्वालियर में  29 स्थानों से उत्साह के साथ निकले पथ संचलन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को हजारों स्वयंसेवकों ने 29 स्थानों से घोष की ध्वनि पर उत्साह के साथ कदमताल करते हुए पथ संचलन निकाले। इस दौरान राहगीरों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा का उनका आत्मीय स्वागत किया।
लश्कर क्षेत्र के आनंद नगर बस्ती का पथ संचलन ऐतिहासिक मान मंदिर (ग्वालियर किला) से पहली बार निकला। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के ग्वालियर विभाग प्रचारक ललित कुमार थे। अध्यक्षता गरगज नगर संघचालक मानसिंह जादौन ने की। इसी तरह नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 29 स्थानों से पथ संचलन निकालकर शस्त्र पूजन किया गया। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति कण-कण में ईश्वर का वास मानने वाली है। हम जड़-चेतन सभी में ईश्वर का वास मानते हैं। पंच परिवर्तन (सामाजिक समरसता, पर्यावरण, स्व का भाव, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य पालन का बोध) के माध्यम से ही भारत सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में संघ कार्य की शुरुआत 1938 में प्रचारक नारायण राव तर्टे ने की थी। इसके लिए डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार ने उन्हें प्रवास व्यय के लिए 5 रुपए देकर भेजा था। आज संघ कार्य निश्चित रूप से बढ़ा है, लेकिन डॉ.हेडगेवार ने सशक्त और विकसित राष्ट्र के लिए जो सपना देखा था वह आज भी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए संघ शताब्दी वर्ष में सभी को इस दिशा में प्राण प्रण से जुट जाना चाहिए।

मुस्लिम समुदाय ने पुष्प वर्षा कर किया स्वागत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन के दौरान अवाड़पुरा क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द की एक मिसाल देखने को मिली। पथ संचलन जब यहां मस्जिद के सामने पहुंचा, तब वहां उपस्थित मुस्लिम समुदाय के लोगों ने स्वयंसेवकों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

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