भोपाल8 जून 2026/मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों के स्थानांतरण की नई नीति लागू कर दी है। इसके तहत तबादला प्रक्रिया 8 जून से शुरू होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों तरह के स्थानांतरण पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे और ऑफलाइन आवेदन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार पहले प्रशासनिक आधार पर तबादले किए जाएंगे। इसके बाद रिक्त पदों की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक की जाएगी, जिसके आधार पर इच्छुक शिक्षक स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। विभाग का दावा है कि ऑनलाइन प्रणाली से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।
यह रहेगा ट्रांसफर का शेड्यूल
अंतर्जिला प्रशासनिक प्रस्तावों का पंजीयन 8 से 15 जून तक किया जाएगा, जबकि जिला, संभाग और राज्य कैडर के प्रस्ताव 17 जून तक दर्ज होंगे। 18 जून को रिक्त पदों की सूची पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके बाद 19 से 23 जून तक स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए जाएंगे। डाटा प्रोसेसिंग और अनुमोदन की प्रक्रिया 24 से 26 जून के बीच पूरी होगी तथा 28 से 30 जून के बीच ऑनलाइन तबादला आदेश जारी किए जाएंगे। शिक्षकों को 30 जून से 6 जुलाई तक कार्यमुक्त होकर नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। स्थानांतरण आदेशों के खिलाफ ऑनलाइन अभ्यावेदन 1 से 7 जुलाई तक प्रस्तुत किए जा सकेंगे, जिनका निराकरण 15 जुलाई तक किया जाएगा।
अतिशेष शिक्षकों का होगा पुनर्विन्यास
नई नीति में स्कूलों में शिक्षकों के संतुलित वितरण पर विशेष जोर दिया गया है। जिन विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक हैं, वहां से उन्हें शिक्षक-विहीन या शिक्षक-अभाव वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। छात्र हित को देखते हुए ऐसे शिक्षकों का स्थानांतरण शैक्षणिक सत्र के दौरान भी काउंसलिंग के माध्यम से किया जा सकेगा। किसी संस्थान में सबसे लंबे समय से कार्यरत शिक्षक को अतिशेष माना जाएगा।
इन कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता
सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष रहने वाले कर्मचारियों को प्रशासनिक स्थानांतरण से छूट दी गई है। वहीं गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिला कर्मचारियों को गृह जिले अथवा सुविधाजनक स्थान पर पदस्थापना में प्राथमिकता मिलेगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के बाद पुराने संस्थान से वेतन आहरण की अनुमति नहीं होगी और आदेशों की अवहेलना करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ई-अटेंडेंस बनी विवाद की वजह
स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए ई-अटेंडेंस को अनिवार्य बनाए जाने पर शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताई है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है कि वर्षों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों के लिए यह शर्त अनुचित है और इसे हटाया जाना चाहिए। हालांकि विभाग का कहना है कि नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह प्रावधान आवश्यक है।
स्थानांतरण नीति की प्रमुख शर्तें
- सभी प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादला आदेश केवल एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जारी होंगे।
- स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए जनवरी से मार्च 2026 के दौरान नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज करने वाले शिक्षक ही पात्र होंगे।
- स्वैच्छिक स्थानांतरण प्राप्त करने वाले शिक्षक के आवेदन पर अगले तीन शैक्षणिक सत्रों तक सामान्य परिस्थितियों में विचार नहीं किया जाएगा।
- परिवीक्षाधीन शिक्षकों के स्थानांतरण पर विशेष प्रतिबंध लागू रहेंगे।
- विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी स्थानांतरण के कारण कोई विद्यालय शिक्षक-विहीन न हो।