ऊर्जा विभाग ने औसत बिलिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। विभाग से जारी निर्देश के मुताबिक 1 अक्टूबर के बाद किसी भी परिस्थिति में बिना रीडिंग के बिल जारी नहीं किए जाने है।
उधर मप्र के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा समय तक बिजली देने के कारण कंपनियों का नुकसान बढ़ रहा है। लिहाजा इस नुकसान को रोकने के लिए, अब जिस इलाके में कृषि फीडर पर 10 घंटे से ज्यादा बिजली प्रदाय की गई, वहां के अधीक्षण यंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश ऊर्जा विभाग ने सभी बिजली कंपनियों को दिए हैं।
विभाग ने कहा कि कई जिलों से शिकायत मिल रही है कि कृषि फीडर को 10 घंटे से ज्यादा बिजली दी जा रही है। इससे कंपनियों का नुकसान बढ़ रहा है। ऊर्जा विभाग की समीक्षा में कहा गया कि जिन इलाकों में बिजली बिल की वसूली नहीं हो पा रही है। वहां के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। विभाग ने कहा है कि कंपनियों को बिजली की सबसिडी के कारण 68 फीसदी राजस्व सीधे सरकार से प्राप्त हो जाता है पर बचा हुआ 32 फीसदी राजस्व भी कंपनियां वसूल नहीं पा रही है। सबसे बुरी स्थिति मध्यप्रदेश के ग्वालियर अंचल की है, जहां हर महीने वसूली में गिरावट आ रही है।
ग्वालियर-भोपाल शहर और ग्रामीण इलाकों में हर महीने वसूली बढऩे के बजाय घट रही है। भिंड में मात्र 95 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से वसूली हो पा रही है। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने कलेक्टरों को लिखे पत्र में पूरे प्रदेश की अगस्त में की गई वसूली का ब्योरा भेजा है। उन्होंने कहा कि वितरण कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं से वसूल किया जाने वाला राजस्व चार रुपए प्रति यूनिट होना चाहिए। कुछ जिलों में यह आंकड़ा बहुत कम है।