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महंगाई से बेहाल देशवासी,सब्जियों के दाम आसमान पर

वर्षों पहले एक प्याज ने पूरी सरकार गिरा थी परंतु इन दिनों पूरा का पूरा सब्जी बाजार ही आसमान छू रहा है। आंकड़े बताते हैं कि खुदरा बाजार में सब्जियों की कीमत मात्र 7 माह में दोगुनी हो गई है। प्रोटीन का प्रमुख स्रोत अंडा और दूध एवं उसके उत्पादों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। हां दालों के बढ़े हुए दाम कुछ कम हुए हैं परंतु अभी भी वो अपनी मूल कीमतों से बहुत ज्यादा है।
खुदरा मुद्रास्फीति 3.58 प्रतिशत पर
खाद्य वस्तुओं खासकर सब्जियों के भाव में तेजी से खुदरा मुद्रास्फीति अक्तूबर में बढ़कर 3.58 प्रतिशत पर पहुंच गयी जो सात महीने का उच्च स्तर है। इस साल मार्च में 3.89 प्रतिशत के बाद खुदरा महंगाई दर का यह उच्चतम स्तर है। उपभोक्ता कीमत सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर सितंबर में 3.28 प्रतिशत थी। पिछले साल अक्तूबर में यह 4.2 प्रतिशत थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के अनुसार खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई दर अक्तूबर में बढ़कर 1.9 प्रतिशत हो गयी। यह सितंबर में 1.25 प्रतिशत थी।
सब्जी खंड में महंगाई दर दोगुनी
सब्जी खंड में महंगाई दर दोगुनी होकर 7.47 प्रतिशत हो गयी जो सितंबर में 3.92 प्रतिशत थी। प्रोटीन का प्रमुख स्रोत अंडा और दूध एवं उसके उत्पादों की महंगाई दर ऊंची रही। हालांकि तिमाही आधार पर अक्तूबर में फलों की कीमतों में कमी आयी। दलहन की महंगाई दर में गिरावट जारी रही और इसमें आलोच्य महीने में 23.13 प्रतिशत की गिरावट आयी। सितंबर में इसमें 22.51 प्रतिशत की गिरावट आयी थी।
ईंधन, बिजली, आवास सब महंगा हुआ
वहीं तिमाही आधार पर ईंधन और बिजली महंगी हुई। आवास खंड में भी उच्च महंगाई दर दर्ज की गयी। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के लिहाज से खुदरा मुद्रास्फीति महत्वपूर्ण है। शीर्ष बैंक मुख्य रूप से इसी आधार पर प्रमुख नीतिगत दर निर्धारण करता है। अब सबकी नजर मौद्रिक नीति समिति की छठी द्विमासिक बैठक पर होगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक 5-6 दिसंबर को होगी। औद्योगिक उत्पादन में नरमी के बीच खुदरा मुद्रास्फीति जून से लगातार बढ़ रही है।
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