Homeप्रमुख खबरेंमामा अध्यक्षी की दौड़ में सबसे आगे ?

मामा अध्यक्षी की दौड़ में सबसे आगे ?

क्या शिवराज सिंह चौहान को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा के अध्यक्ष पद की कमान सौंपी जा सकती है? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि पार्टी के भीतर से जिस प्रकार की खबरें छनकर बाहर आ रही हैं उसके मुताबिक भाजपा के अध्यक्ष पद की दौड़ में शिवराज का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि मोदी शासनकाल में किसे क्या जिम्मेदारी मिल जाए यह कयास लगाना बेहद कठिन काम है बावजूद इसके नए अध्यक्ष पर जिन न

बीजेपी के एक पदाधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में  राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संभावित बताया है, वे सारे के सारे भाजपा के बड़े नेता हैं। ये छह नाम हैं- धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, मनोज सिन्हा और डॉ के लक्ष्मण। विनोद तावड़े का नाम भी इसी सूची में शामिल है।

बीजेपी नेताओं के मुताबिक इन वरिष्ठ नेताओं में से ही पार्टी किसी एक पर दांव लगा सकती है, इसके अलावा अगर पार्टी के वर्तमान नेचर को दृष्टिगत रखा गया तो किसी महिला चेहरे को भी पार्टी आगे ला सकती है।

यह चेहरा कौन होगा इसपर फिलहाल कयास लगाना कठिन होगा यह कोई चौकाने वाला नाम भी हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा का लगातार कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा है। बीजेपी में एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत चलता है। लेकिन, जे पी नड्डा के मामले में पार्टी इसका पालन नहीं कर पा रही है वे काफी समय से  पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ केंद्र में मंत्री भी हैं। शायद पीएम मोदी ने यही सोचकर उन्हें कैबिनेट में साथ लिया था कि संगठन में चुनाव के बाद वह इसकी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएंगे।
लेकिन विविध कारणों से उनका कार्यकाल बढ़ता रहा पहले तो उनका कार्यकाल पिछले साल लोकसभा चुनावों के लिए बढ़ाया गया और फिर हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली विधानसभा चुनावों की वजह से आगे किया गया। बाद में संगठनात्मक चुनाव में देरी हुई। लेकिन, अभी बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ महीने बाकी हैं और संगठन के चुनाव हो चुके हैं, इसलिए अब माना जा रहा है कि बहुत जल्द पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है।
जैसी की जानकारी आ रही है पार्टी अब कभी भी इस बारे में औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
वैसे भी यह प्रक्रिया लंबे समय से टलती जा रही है। पहले राज्यों में संगठनात्मक चुनाव को लेकर मामला लटकता रहा था। लेकिन, जानकारी के मुताबिक यह काम अब लगभग पूरा हो चुका है।
बीजेपी के संविधान के अनुसार ये चुनाव राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के लिए जरूरी हैं। एमपी में वीडी शर्मा के स्थान पर बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल, बीजेपी के नए प्रदेशाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल चुके हैं। 2 जुलाई को उनकी नियुक्ति के साथ ही बीजेपी अब तक 26 राज्यों के लिए प्रदेशाध्यक्षों की नियुक्ति कर चुकी है। इसी के साथ ही जेपी नड्डा के स्थान पर पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का रास्ता भी साफ हो गया है।
मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के भी चहेते रहे हैं, इसलिए संभावना है कि उसी नाम पर अंतिम मुहर लगेगी, जिसे इन दोनों का ही आशीर्वाद प्राप्त होगा।
शिवराज का नाम सबसे ऊपर
 
शिवराज सिंह चौहान: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बड़े ओबीसी नेता हैं। अभी विदिशा से लोकसभा सांसद हैं और केंद्र में कृषि और किसान कल्याण, ग्रामीण विकास मंत्री हैं।
धर्मेंद्र प्रधान: ओडिशा के संबलपुर से सांसद हैं। यह ओबीसी नेता हैं और उन्हें बीजेपी संगठन और इलेक्शन मैनेजमेंट का अच्छा अनुभव है। अभी केंद्र में शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं।

 
मनोहर लाल खट्टर:हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मंत्री हैं और अभी प्रदेश की करनाल लोकसभा सीट से सांसद हैं। मोदी सरकार में उन्हें आवास और शहरी मामले, ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार मिला हुआ है। आरएसएस के लिए जमीनी स्तर पर काम करते हुए राजनीति में आए हैं और संगठन के काम से अच्छी तरह से वाकिफ हैं।

मनोज सिन्हा: अभी जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल हैं, लेकिन पहले केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अच्छे प्रशासक माने जाते हैं, इसलिए इनका नाम भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में तेजी से उभर कर आया है।

डॉ के लक्ष्मण: अभी बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी के राज्यसभा सदस्य हैं और तेलंगाना बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। तेलंगाना की मुशीराबाद विधानसभा का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। संघ से जुड़े रहे हैं और अच्छे संगठनकर्ता समझे जाते हैं।
विनोद तावड़े : इसी क्रम में विनोद तावड़े का नाम भी अध्यक्ष की दौड़ में  लिया जा रहा है।
एएनआइ की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजेपी अपने नए अध्यक्ष का चयन करते समय तीन प्रमुख कारकों पर विचार कर रही है: संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और जातिगत समीकरण। पार्टी जल्द ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया की देखरेख के लिए एक केंद्रीय चुनाव समिति का गठन कर सकती है। यह समिति नामांकन, जांच और आवश्यक होने पर मतदान के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करेगी।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments