भारत बंद वाले दिन यदि सबसे ज्यादा किसी की चर्चा थी तो वह थी मुरैना के सांसद अनूप मिश्रा की। ग्वालियर से लेकर मुरैना तक जिसको देखो वह अपने मिसुर जी की ही बात करता दिखाई दिया। एकबार तो ऐसी खबर उड़ी की ब्राह्मण वादी खून सवर्णों की हुंकार सुन उबाल मारकर उनके पक्ष में आ खड़ा हुआ है। किसी ने यह भी उड़ा दी उन्होंने अपना कमलदल छोड़ पँजादल का दामन थाम लिया है। मीडिया में खलबली मच गई,फोन घनघना ऊठे लेकिन पता चला ऐसा कुछ भी नहीं है। मिसुर जी जहां थे वहीं हैं। उनके नज़दीकियों ने इस खबर पर तंज मारा यह तो नेताजी को बदनाम करने वालों का षडयंत्र है। इस बात में कितनी सत्यता है यह तो वही जाने लेकिन उनके समर्थक बेचैन जरूर दिखाई देते हैं। हों भी क्यों नहीं क्यों कि चुनाव चन्द महीने दूर हैं और पता नहीं ताल कहां से ठोकेंगे अपने मिसुर जी । कोई कहता है पूर्व से तो कोई दक्षिण की बात करता है भितरवार लहार की भी चर्चा है। कुछ लोग कमलदल में अंदरूनी अदावत से भी मिसुर जी के भविष्य को जोड़कर गणित लगा रहे हैं दिल्ली छोड़ भोपाल जाने का मौका पार्टी देती भी है या नहीं।
मिसुर जी को लेकर क्यों है चर्चाओं का बाजार सरगर्म
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