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युवा तुर्क वीडी शर्मा की नियुक्ति करके भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने दिए कई संकेत,बढेगा चम्बल का दबदबा

प्रवीण दुबे

थोड़े से अंतर से मध्यप्रदेश से सत्ताच्युत हुई भाजपा ने युवा नेता वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान देकर देर ही से सही लेकिन सही निर्णय लिया है। साथ ही यह संकेत भी दे दिए हैं की पार्टी अपनी पुरानी संघर्ष वाली राजनीति की ओर वापस लौट रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश की कमान एक ऐसे युवा चेहरे को सौंप दी है जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व से न केवल युवा जोश झलकता है बल्कि उसके भीतर विपरीत परिस्थितियों में भी सँगठनात्मकता को जीवंत रखकर कार्य करने का कौशल विधमान है। यहां यह लिखने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए की मध्यप्रदेश के तमाम बड़े नेताओं के बीच वर्तमान अध्यक्ष राकेश सिंह की दब्बू छवि के कारण भाजपा को कई बड़े नुकसान उठाने पड़े। यही वजह रही की प्रदेश में पार्टी की संगठनात्मक पकड़ ढीली पड़ती चली गई और व्यक्तिनिष्ठा ने जमकर पेर पसार लिए।

ऐसे समय में पार्टी को जहां संगठन की रीतियों नीतियों को समझने वाले चेहरे की जरूरत थी वहीं सुस्त पड़े कार्यकर्ताओं में  जोश भरने वाले नेता की भी दरकार थी। पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर परेशान था की 15 वर्षों के सत्तासुख ने नेताओं, कार्यकर्ताओं दोनों ही में विपक्ष की भूमिका का संघर्ष समाप्त कर दिया उनमें नई ऊर्जा का संचार कैसे किया जाए। इस माहौल में वी डी शर्मा जैसे चेहरे को सामने लाकर पार्टी नेतृत्व ने परिवर्तन का संकेत दिया है। 

वी डी शर्मा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से निकलकर राजनीति में आए हैं। वे लंबे समय तक एबीवीपी के भीतर मजबूत शशक्त संगठनात्मक चेहरा रहे हैं और समय समय पर कई विषयों को लेकर प्रदेश स्तर पर संघर्ष भी किया है। उनकी इसी जुझारू प्रकृति के मद्देनजर उन्हें खजुराहो जैसे अपरचित संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया गया और वे संगठन की उम्मीदों पर खरे उतरे। उन्होंने पार्टी महासचिव के पद पर रहते हुए भी अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की वीडी शर्मा प्रदेश के जिस ग्वालियर चम्बल अंचल से आते हैं वहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था । पार्टी को यहां 34 में से कुल 6  सीटों पर ही जीत मिल सकी थी। अतः अब इसी अंचल के मुरैना जिले में पैदा हुए व ग्वालियर से शिक्षा प्राप्त करने वाले तेजतर्रार युवा चेहरे का पार्टी में  वर्चस्व बढ़ने से इस अंचल में निश्चित ही भाजपा का दबदबा बढ़ेगा । इसके साथ ही एक सशक्त ब्राह्मण चेहरे की कमी भी पूरी हुई है।

 

 

 

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