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युवा दिवस पर कल इसरो करेगा एक साथ 30 उपग्रहों का प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो आसमान में एक और नई उड़ान भरने को तैयार है. नये साल में इसरो की 100वें उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए 28 घंटों की उलटी गिनती आज से शुरू हो गई. चेन्नई से 110 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इस 100वें उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रह भी अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किये जायेंगे. यानी शुक्रवार को कुल 31 उपग्रह प्रक्षेपित किये जाएंगे.

अपने इस 42वें मिशन के लिए इसरो भरोसेमंद कार्योपयोगी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी40 को भेजेगा जो कार्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह और 30 सह-यात्रियों (जिनका कुल वजन करीब 613 किलोग्राम है) को लेकर कल सुबह यानी 12 जनवरी को 9 बजकर 28 मिनट पर उड़ान भरेगा. मिशन तैयारी समीक्षा समिति और प्रक्षेपण प्राधिकरण बोर्ड द्वारा तय किए गए समय पर मुहर लगाए जाने के बाद इसरो ने कहा, “पीएसएलवी-सी40/ कार्टोसेट2 श्रृंखला के उपग्रह मिशन की 28 घंटे की उलटी गिनती आज सुबह पांच बजकर 29 मिनट (भारतीय समयानुसार) पर शुरू हो गई.”

 संस्थान ने बताया कि वैज्ञानिक फिलहाल उड़ान के विभिन्न चरणों के लिए प्रोपलेंट भराव के कार्य में लगे हुए हैं. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से इस 44.4 मीटर लंबे रॉकेट को प्रक्षेपित किया जाएगा. सह-यात्री उपग्रहों में भारत का एक माइक्रो और एक नैनो उपग्रह शामिल है जबकि छह अन्य देशों – कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के तीन माइक्रो और 25 नैनो उपग्रह शामिल किए जा रहे हैं. इसरो और एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच हुए व्यापारिक समझौतों के तहत इन 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जाएगा. यह 100वां उपग्रह कार्टोसेट -2 श्रृंखला का तीसरा उपग्रह होगा.

साल 2018 में पीएसएलवी का यह पहला मिशन है, जिसके अंतर्गत अंतरिक्ष अभियान के तहत ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी40) के जरिए 31 उपग्रह लॉन्च किए जाएंगे. इस अभियान से चार महीने पहले 31 अगस्त को इसी तरह का रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा में भारत के आठवें नौवहन उपग्रह को पहुंचाने में विफल रहा था.
इस मिशन में काटरेसैट-2 के अलावा भारत का एक नैनो उपग्रह और एक माइक्रो उपग्रह भी लॉन्च किया जाएगा. काटरेसैट-2 एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो उच्च-गुणवत्ता वाला चित्र प्रदान करने में सक्षम है, जिसका इस्तेमाल शहरी व ग्रामीण नियोजन, तटीय भूमि उपयोग, सड़क नेटवर्क की निगरानी आदि के लिए किया जा सकेगा.

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