ग्वालियर चम्बल के दो दिवसीय दौरे के पहले दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी रणनीति में काफी हद तक कामयाब कहे जा सकते हैं ग्वालियर में सफल रोड शो और दतिया से लेकर ग्वालियर की आमसभा तक बेजान पड़ी कांग्रेस में पहलीबार उत्साह देखने को मिला , इस सफलता ने निःसंदेह दिल्ली दरबार में ज्योतिरादित्य के नम्बर भी बढ़ा दिए हैं , देखना दिलचस्प होगा कि अपने दौरे के दूसरे दिन भी राहुल गांधी ऐसा ही वातावरण बनाने में कामयाब रहते हैं, यदि ऐसा होता है तो निश्चित ही भाजपा के लिए यह धड़कनें बढ़ाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम कहा जायेगा।
मध्यप्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीख़ लगभग एक माह दूर है। पिछले चुनाव से तुलना की जाए तो इसबार कांग्रेस अपनी रणनीति में काफी हद तक कामयाब होती दिख रही है । इसका अर्थ यह कदापि नहीं लगाया जाना चाहिए कि कांग्रेस ने चुनाव में निर्णायक बढ़त बना ली है या फिर उसका सरकार बनाना तय है। आज की स्थिति में वो कामयाब इस कारण कही जा सकती है कि राहुल गांधी मध्यप्रदेश जैसे राज्य में जहां कांग्रेस लगातार तीनबार से हार का मुंह देखती आ रही थी,जमीनी स्तर पर उसका संगठनात्मक ढांचा तहस नहस हो चुका था, विविध इलाकों में अलग अलग छत्रप कांग्रेस के समकक्ष अपनी खुद के समर्थकों की फ़ौज को खड़ी करके गुटबाजी को खुलेआम बढावा दे रहे थे। वहां पहली बार कांग्रेस नेताओं और बचे खुचे कार्यकर्ताओं ने एक साथ ग्वालियर अंचल की सड़कों पर निकलने का साहस दिखाया है। यह बहुत बड़ी बात है और इसका श्रेय ज्योतिरादित्य और राहुल गांधी दोनों को दिया जा सकता है।
जैसा की हमने ऊपर लिखा है चुनाव में मतदान की तारीख में अभी एक माह से थोड़ा कम समय बचा है। अतः कांग्रेस नेतृत्व इस उत्साहपूर्ण वातावरण को कायम रखने में कामयाब रहा तो निश्चित ही यह भाजपा के लिए गुजरात की तर्ज पर परेशानी का कारण बन सकता है। लेकिन कांग्रेस के लिए इस उत्साह को कायम रख पाना आसान नहीं होगा ऐसा इस कारण से क्योंकि अभी टिकट वितरण होना शेष है ,ऐसी स्थिति में टिकिट की दौड़ में शामिल हर नेता श्रेष्ठ प्रदर्शन को बाध्य है , असली परीक्षा तो उस समय होगी जब टिकिट वितरण शुरू होगा और जिसे टिकिट नहीं मिला उसका रिएक्शन क्या होगा ? 
जहां तक भाजपा का सवाल है ग्वालियर अंचल में पहले उग्र होते सवर्ण आंदोलन ने उसकी परेशानी बढ़ाई हुई थी, जैसे तैसे यह आंदोलन ठंडा पड़ा तो राहुल गांधी के दो दिवसीय दौरे के पहले दिन ग्वालियर में हुए उनके रोड शो तथा डबरा दतिया आदि स्थानों पर आशा से कहीं अधिक भीड़ व उत्साह ने भाजपा की बेचैनी को ओर बढ़ा दिया है। निःसन्देह अब भाजपा अपनी रणनीति में परिवर्तन करेगी यह परिवर्तन क्या होगा यह देखना दिलचस्प होगा
