सामान्यतः राज्य सरकारें जनता को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं दवाएं आदि उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध होती हैं लेकिन कर्नाटक की कांग्रेस सरकार राजनीतिक वैमनस्यता के चलते इतनी नीचे गिर गई कि उसने राज्य सरकार के अस्पतालों में सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने वाले प्रधानमंत्री जन औषधि आउटलेट दुकानों को बंद करने का फरमान जारी कर दिया है।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और केंद्र के बीच ताजा टकराव की स्थिति बन रही है, राज्य के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों ने राज्य सरकार के अस्पतालों में जन औषधि आउटलेट बंद करने का फैसला किया है। केंद्र की प्रधानमंत्री जन औषधि योजना जनता को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराती है। मंत्री का कहना है कि यह निर्णय सरकार की नीति के अनुरूप है, जो गरीब मरीजों को अस्पतालों में मुफ्त दवाएं प्रदान करने पर केंद्रित है। इसके तहत, अस्पतालों के भीतर औषधि केंद्रों की स्थापना गरीबों को मुफ्त दवाओं की उपलब्धता में विघ्न डाल सकती है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
भाजपा ने इस फैसले को गरीब विरोधी बताते हुए आलोचना की है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता एस. प्रकाश ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरण प्रकाश पाटिल गरीब लोगों की समस्या को नहीं समझ रहे हैं। लोगों को हर दवा मुफ्त मिल रही है, ऐसा कहना बहुत सरल है, लेकिन जमीनी हकीकत को देखें तो यह संभव नहीं है। जबकि जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड दवाओं को नहीं बेचते। वे सिर्फ जेनरिक दवाओं को बेचते हैं जो बाजार में सबसे सस्ती दवाओं से भी 60 से 70 फीसदी सस्ती होती हैं।’
मुफ्त दवाओं का सरकार ने किया वादा
डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार गरीबों के हित में काम कर रही है और मुफ्त दवाओं की नीति को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह समझने की जरूरत है कि उनकी सरकार हर व्यक्ति को मुफ्त दवाएं प्रदान करती है और यह निर्णय उसी नीति का हिस्सा है। मंत्री ने भाजपा की आलोचनाओं को नकारते हुए कहा कि भाजपा हर चीज में खरीद-फरोख्त के आरोप लगाती है और उन्हें यह नहीं पता कि सरकार गरीबों को निःशुल्क दवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा, ‘राज्य सरकार का यह कदम कांग्रेस की नफरत भरी राजनीति को दर्शाता है। इससे पहले, इसने केंद्र की किसान सम्मान योजना के तहत किसानों को 4,000 रुपये का अतिरिक्त अनुदान देने के लिए बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरू की गई योजना को बंद कर दिया था। अब, यह गरीब मरीजों के लिए बने जन औषधि केंद्रों पर प्रतिबंध लगाने जा रही है। हम इसका विरोध करेंगे।’