राजस्थान पत्रिका के खिलाफ श्रम न्यायालय का बड़ा फैसला
मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार कर्मचारी को 15.26 लाख अदा करने के आदेश
पत्रिका को प्रकरण व्यय भी देना होगा कर्मचारी को, प्रार्थी ब्याज के लिए मुकदमा लगाने के लिए स्वतंत्र
ग्वालियर। श्रम न्यायालय क्रमांक एक ग्वालियर के न्यायाधीश केसी यादव ने मजीठिया वेजबोर्ड के मामले में महत्वपूर्ण फैसला किया है। न्यायालय ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार ग्वालियर पत्रिका में कार्यरत सीनियर एक्जीक्युटिव रवि जायसवाल को 15 लाख 26 हजार 37 रूपए अदा करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रार्थी रवि इस राशि पर ब्याज पाने का पात्र है, ब्याज तथा भविष्य निधि राशि के लिए पृथक से दावा प्रस्तुत कर सकता है। ग्वालियर में पत्रिका के खिलाफ चल रहे मामलों में यह लगातार तीसरा मामला है जिसमें पत्रिका को करारा झटका लगा है।
न्यायाधीश केसी यादव द्वारा दिए गए आदेश में कहा गया है कि पूर्व में भुगतान की गई पीएफ राशि जो वर्तमान प्रकरण में वेजबोर्ड की सिफारिशों से भुगतान पर कम की गई प्रार्थी यह राशि भविष्य निधि राशि की गणना में पाने का अधिकारी होगा। इसके अलावा न्यायालय ने प्रकरण व्यय के रूप में दो हजार रूपए भी रवि जायसवाल को दिए जाने के आदेश पत्रिका को दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि यह आदेश उच्चतम न्यायालय द्वारा 28 जनवरी 2019, 19 जून 2017 तथा 13 अक्टूबर 2017 को पारित आदेश के प्रभाव में पारित किया गया है। न्यायालय ने कहा कि पत्रिका प्रबंधन ने प्रार्थी को भुगतान की गई राशि का कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है। जबकि प्रार्थी की वेतन हित लाभ को लेकर साक्ष्य विश्वास योग्य होने से उपरोक्त आदेश दिया जाता है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी रवि को मजिठिया वेतनमान की सिफारिशों के अनुसार शोध्य वेतन 26 लाख 80 हजार 418 रूपए होता है। जिसमें से उसे प्राप्त वेतन 11 लाख 54 हजार 381 रूपए को घटाकर वह 15लाख 26 हजार 37 रूपए प्राप्त करने का अधिकारी है। न्यायालय ने मजिठिया वेज बोर्ड के अनुसार प्रार्थी को किस प्रकार कितना वेतन मिलना चाहिए इसकी गणना करते हुए उपरोक्त आदेश पारित किया है।
न्यायालय ने इन बिंदुओं पर सुनाया फैसला
-न्यायालय ने कहा कि प्रार्थी श्रमजीवी पत्रकार एवं अन्य समाचार पत्र कर्मचारी एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम 1955 के तहत कर्मचारी की श्रेणी में आता है। इसलिए वह वेज बोर्ड का लाभ प्राप्त कर सकता है।
-न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मजीठिया वेज बोर्ड की शर्त क्रमांक 20 जे के तहत विकल्प भरकर वेज बोर्ड के लाभ स्वेच्छा त्यागने के बाद भी वह सहायता प्राप्त करने का अधिकारी है।
-न्यायालय ने प्रकरण के विलंब से प्रस्तुत करने के कारण इसे निरस्त करने के पत्रिका के आवेदन को खारिज कर दिया।
-न्यायालय ने माना कि कि मजीठिया वेज बोर्ड के आधार पर प्रार्थी रवि वेतन हितलाभ पाने का अधिकारी है।
न्यायालय ने पत्रिका की आपत्तियां की निरस्त
इस मामले में समय-समय पर पत्रिका द्वारा की गई आपत्तियों को भी निरस्त कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि मजीठिया वेज बोर्ड के संबंध में वेजबोर्ड की सिफारिशों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाने पर उच्चतम न्यायालय ने याचिकाओं का 7 फरवरी 2014 को अंतिम निराकरण करते हुए बोर्ड की सिफारिशों को 11 नवंबर 2011 से लागू की है। पत्रिका समाचार पत्र में कार्यरत कर्मचारी को पत्रिका ने अपने द्वितीय संस्थान व्यावसायिक क्षेत्र टीवी न्यूज, डिजिटल न्यूज, आउटडोर पब्लिसिटी, इवेंट, एफएम रेडियो एवं पब्लिकेशन डिवीजन में कार्यरत बताया, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने माना प्रार्थी की मार्केटिंग विभाग में नियुक्ति होना प्रमाणित है। उसमें पद व कार्य वर्णित नहीं है। पत्रिका ने कहा कि प्रार्थी ने 20 जे भर कर दिया था, इस पर न्यायालय ने कहा कि यह वेज बोर्ड की शर्त नहीं है। न्यायालय ने पत्रिका की ओर से कराए गए असिस्टेंट मैनेजर के कथन को झूठा करार दिया है।