प्रवीण दुबे
ग्वालियर के ह्रदय स्थल कहे जाने वाले महाराज बाड़ा से सटे वार्ड 43 में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर है कहने को तो यह भी ग्वालियर नगरनिगम के 66 वार्डों के समान ही है लेकिन इस वार्ड में टिकिट को लेकर जिस प्रकार की राजनीतिक गतिविधियां दिखाई दे रही हैं वह अपने आप में आश्चर्यजनक कही जा सकती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने तथा इस वार्ड पर अपना एकाधिकार समझने वाले चेहरों पर वक्त की मार ने इस वार्ड के राजनीतिक खेल को बहुत कुछ बिगाड़ दिया है।

एक समय था जब इस वार्ड में कांग्रेस के बाहुबली नेताओं में शुमार शम्मी शर्मा का वर्चस्व कायम था,भले ही आरक्षण के कारण यह वार्ड प्रभावित रहा लेकिन शम्मी शर्मा ने जिसपर हाथ रखा वही जीता। वह शम्मी शर्मा ही थे जिन्होंने राजनीति में गुमनाम चेहरे रहे अपने चेले अनिल सांखला को इस वार्ड में स्थापित करके विरोधियों को जमने नहीं दिया यह बात अलग है कि पिछले चुनाव में इस वार्ड से सटे अन्य वार्ड से शम्मी को हिन्दू महासभा से मुंह की खानी पड़ी थी। उधर शम्मी हारे तो दूसरे पड़ोसी वार्ड से उनके चेले अनिल सांखला को गंगाराम बघेले के हाथों की मुंह की खानी पड़ी इस प्रकार गुरु चेले दोनों का वर्चस्व समाप्त हो गया और भाजपा व हिन्दू महासभा का विजयी परचम लहरा उठा ।