हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 09 जुलाई 2021, दिन शुक्रवार को है। आज के दिन अमावस्या सुबह 5 बजकर 16 मिनट पर शुरू हुई है। कल भी तिथि 7 बजे तक रहेगी। इसलिए इस बार जो दिन अमावस्या मनाई जाएगी। आज के दिन हलहारिणी अमावस्या है, इस दिन खेतों की जुताई नहीं की जाती। हल और बैल की पूजा की जाती है।
वहीं कल शनिश्चरी अमावस्या मनाई जाएगी। शनिवार के दिन अमावस्या तिथि होने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन दान और स्नान से जीवन के सभी पाप दूर होते हैं। इस पर्व पर पितृ पूजा करने से परिवार वालों की उम्र और सुख-समृद्धि भी बढ़ती है।
इसके अगले दिन रविवार और पुष्य नक्षत्र होने से रविपुष्य महायोग बनेगा। इस शुभ संयोग में गुप्त नवरात्र भी शुरू हो रहे हैं। इस दिन सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग भी रहेंगे। ऐसे में अमावस्या व्रत इसी दिन रखा जाएगा। अमावस्या तिथि 09 जुलाई की सुबह 05 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और 10 जुलाई को सुबह 06 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। व्रत पारण 10 जुलाई, दिन मंगलवार को होगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में अमावस्या पड़ती है। अमावस्या का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व होता है। इस समय आषाढ़ का महीना चल रहा है और आषाढ़ माह की अमावस्या 9 व 10 जुलाई 2021 को है। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान का बहुत अधिक महत्व होता है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से घर में रहकर ही स्नान करने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान करें। स्नान करते समय मां गंगा का ध्यान जरूर करें। आषाढ़ अमावस्या पर कुछ उपाय करने से पितृ और कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुंडली में जब राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण हो जाता है। कालसर्प दोष की वजह से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उपाय – कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या के पावन दिन विधि- विधान से भगवान शिव की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। इस दिन दूध, गंगा जल, इत्यादि से भोलेनाथ का अभिषेक करें। भोलेनाथ को भोग भी लगाएं और उनकी आरती करें। भगवान शिव की पूजा- अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल सकती है।
पितृ दोष
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कुंडली में दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें और दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति बनने पर पितृ दोष लग जाता है। सूर्य के तुला राशि में रहने पर या राहु या शनि के साथ युति होने पर पितृ दोष का प्रभाव बढ़ जाता है। इसके साथ ही लग्नेश का छठे, आठवें, बारहवें भाव में होने और लग्न में राहु के होने पर भी पितृ दोष लगता है। पितृ दोष की वजह से व्यक्ति का जीवन परेशानियों से भर जाता है।
पितृ दोष उपाय- इस दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या के दिन पितर संबंधित कार्य करने चाहिए। पितरों का स्मरण कर पिंड दान करना चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी भी मांगनी चाहिए।