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शिवराज के लिए गेम चेंजर साबित होगी लाडली बहना योजना

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चंद घंटे बाद जबलपुर से प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग सवा करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों मे लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत एक एक हजार रूपए ट्रांसफर करेंगे

भोपाल/मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार की  लाडली बहना योजना जहां प्रदेश की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में बड़ी भूमिका  निभाएगी वहीं दूसरी ओर विधानसभा चुनावों के मुहाने पर खड़ी मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार के लिए लाडली बहना योजना गेम चेंजर भी साबित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि अब से चंद घंटों बाद शाम 6 बजे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जबलपुर से प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग सवा करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों मे लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत एक एक हजार रूपए ट्रांसफर करने वाले हैं।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जबलपुर मुख्यालय से शाम 6 बजे राज्य स्तरीय समारोह में बहनों से संवाद कर सिंगल क्लिक से राशि अंतरित करेंगे।

अपने आप में देश की अनूठी इस योजना के प्रति बहनों में जो उत्साह देखने को मिला है, उसी का परिणाम है कि 5 मार्च 2023 को मुख्यमंत्री चौहान द्वारा योजना की घोषणा के सिर्फ 35 दिन में एक करोड़ 25 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इन सभी आवेदनों का परीक्षण कर पात्र आवेदक बहनों के खातों का केवायसी का कार्य युद्ध स्तर पर करवाया गया। परिणाम स्वरूप एक जून से पात्र बहनों को स्वीकृति-पत्रों का वितरण भी अभियान चला कर किया गया। अब प्रदेश की बहनों को इंतजार है 10 जून की शाम 6 बजे का, जब मुख्यमंत्री चौहान सभी पात्र बहनों के बैंक खाते में एक-एक हजार रूपये की राशि अंतरित करेंगे। इस दिन और समय को यादगार बनाने के लिये सभी जिलों में अनेक गतिविधियों के साथ उत्सव का माहौल रहेगा। मुख्यमंत्री चौहान के दिल से निकली ” मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना” सवा करोड़ बहनों की जिन्दगी को आसान बनाने और खुशियों से भरने में अहम भूमिका अदा करेंगी। मुख्यमंत्री चौहान कहते है कि प्रदेश की मेरी बहनों के लिये खुशहाली का नया दौर प्रांरभ हो रहा है, आइये उत्सव के साथ खुशियाँ मनाये। 
 
उधर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एंटी इनकंबेंसी से परेशान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नजर प्रदेश के 48 फीसदी महिला वोटर पर है यही वजह है कि  मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना राजनीतिक गेम चेंजर साबित हो सकती है ऐसा यह सही है कि एमपी में जीत की राह आदिवासी, एससीएसटी वोटबैंक के द्वार से होकर ही गुजरती है लेकिन. इसके अलावा इस समय राजनीति का केंद्र प्रदेश की महिला वोटबैंक पर भी है. इस समय के ताजा आंकड़े तो यही बताते हैं कि देश की 50 प्रतिशत आबादी यानि महिलाओं की वोटिंग प्रतिशत में भी भागिदारी बढ़ी है. ऐसे में इन्हें लुभाने के लिए दोनों राजनीतिक दल कमर कस रहे हैं. महिलाओं का वोट बैंक कितना अधिक महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक और जहां शिवराज सिंह ने लाडली बहना योजना की घोषणा करके महिलाओं को लुभाने का कार्य किया तो दूसरी ओर सत्ता से बाहर बैठी कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद महिलाओं को लुभाने वाली योजना लागू करने की घोषणा कर दी साफ है महिलाओं का वोट बैंक दोनों ही पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है
मध्य प्रदेश के पुराने इलेक्शन में साल 2005 के बाद से लगातार महिला वोटरों का प्रतिशत बढ़ा है. साल 2014-15 के चुनाव में महिला मतदाताओं ने पुरुष मतदाताओं की बराबरी में वोटिंग की थी. ये ऐसे पता चलता है कि साल 2004 में पुरुष मतदाताओं का वोट प्रतिशत 78.84% और महिला मतदाताओं का वोट प्रतिशत 74.58% था. ये बाद में बढ़कर 2009 में पुरुष का 81.7% और महिला का प्रतिशत 79.21% रहा. वहीं 2014-15 में पुरुष मतदाताओं का वोट प्रतिशत 83.59% था और महिला मतदाताओं का वोट प्रतिशत 83.17 प्रतिशत था. इसलिए इस बार दोनों पार्टियों का इनपर फोकस
प्रदेश के 53 में से 41 जिले ऐसे हैं जहां महिला मतदाताओं की संख्या, पुरुषों की तुलना में तेजी से बढ़ी है। जनवरी में जारी की गई पुनरीक्षित मतदाता सूची में महिला मतदाताओं की संख्या 7.7 लाख बढ़ी है। राज्य की 18 विधानसभा सीटों में महिला मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। वारासिवनी, बरघाट, पानसेमल, अलीराजपुर, जोबट, झाबुआ, बालाघाट, सरदारपुर थांदला, पेटलावद, कुक्षी, सैलाना, डिंडोरी, विदिशा, देवास, मंडला, बैहर, परसवाड़ा में महिला मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक हैं। ऐसे में ये बात तो तय है कि विधानसभा चुनावों में महिला मतदाता निर्णायक वोटर भी साबित होंगे। महिला मतदाताओं के सबसे ज्यादा नाम जोड़े जाने से लिंगानुपात भी बढ़कर 926 से 931 हो गया है।
प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में कुल 51 महिला कैंडिडेट्स मैदान में थीं। केवल 17 महिलाएं चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। हालांकि राज्य में उपचुनाव हुए थे जिसके बाद महिला उम्मीदवारों की संख्या 21 हो गई थी। शिवराज कैबिनेट में अभी तीन महिलाओं के पास मंत्रालय है। वहीं, कई अहम पदों पर महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। मध्यप्रदेश में महिला वोटर्स की आबादी करीब 48 फीसदी है।
राज्य में महिला वोटर्स की संख्या 2,60,23,733 । बीते कुछ चुनावों में एमपी में बदला हुआ ट्रेंड देखने को मिला है। साल 2013 में महिलाओं का वोट प्रतिशत 70.11 फीसदी था। 2018 के चुनाव में महिला ने 73.86 फीसदी वोट किया था। राज्य में महिलाओं का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है जिस कारण से महिला वोटर्स को साधने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि शिवराज सरकार ने लाडली बहना योजना के जरिए शिवराज सरकार महिलाओं के खाते में सीधे एक हजार रुपए डालेगी। वहीं, शासकीय अधिकारियों कर्मचारियों को 7 दिन का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश देकर उनकी सेहत का भी ध्यान रखने की बात अब सरकार कर रही है। वहीं बजट में स्कूली छात्राओं को भी साधने के लिए सरकार ने बड़ी घोषणा की है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 12वीं फर्स्ट क्लास से पास होने वाली छात्राओं को ई-स्कूटी दी जाएगी।
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