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शिवराज नरोत्तम की जोड़ी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी सत्ता के बाद संगठन में भी बढ़ा मिश्रा का कद

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के संकट मोचक के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले मध्यप्रदेश के चर्चित मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा एक बार पुनः चर्चा में हैं। राजनीति के गलियारों से छन कर आने वाली खबरों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि सत्ता और संगठन दोनों उनके कामकाज से बेहद प्रभावित है। ऐसी स्थिति में उनका राजनीतिक कद और बढ़ाये जाने की सम्भावना बलवती गई है।

अपनी विकासात्मक सोच और प्रभावी व्यक्तित्व के सहारे मध्यप्रदेश सरकार और ग्वालियर चम्बल सम्भाग की जनता के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके डॉ नरोत्तम मिश्रा उनपे लगे चुनाव आयोग के पेड न्यूज़ संबधी निर्णय जिसमें कि उन्हें 3 वर्ष के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया गया था के खिलाफ कोर्ट से राहत मिलने के बाद प्रदेश की राजनीति में और अधिक ताकतवर बनकर उभरे हैं।
केबिनेट के निर्णयों को प्रेस के बीच रखने की बात हो या फिर सरकार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषय ,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इनको लेकर डॉ मिश्रा पर पूर्ण विश्वास करते देखे जा सकते हैं।
डॉ मिश्रा की भूमिका सत्ता और संगठन में किस प्रकार बढ़ी है इसका प्रमाण उस वक्त भी सामने आया जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने तीन दिवसीय संगठनात्मक प्रवास पर मध्यप्रदेश आये थे। इस प्रवास के दौरान व्यवस्थाओं से लेकर अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के बारे में मुख्यमंत्री यदि सर्वाधिक किसी पर विश्वास करते दिखाई दिए तो वह नरोत्तम मिश्रा ही थे।
इतना ही नहीं उस समय नरोत्तम का राजनीतिक जलवा  देख न केवल पूरी की पूरी भाजपा हतप्रभ रह गयी बल्कि प्रेस और गैर राजनीतिज्ञ भी दंग हो उठे जब अमित शाह के डॉ मिश्रा के घर लंच करने की बात सामने आई। यही वह स्थान भी था जहां अमित शाह ने अनोपचारिक चर्चा में इस बात की घोषणा की थी कि आने वाले विधानसभा चुनाव में शिवराज ही भाजपा का अधिकृत चेहरा होंगें अर्थात अगला चुनाव शिवराज के  नेतृत्व में ही लड़ा जायेगा। नरोत्तम के घर लंच पर अमित शाह द्वारा की गई यह घोषणा पूरे देश के अखबारों में सुर्खियों के साथ छपी और इसने भी नरोत्तम को खूब चर्चित कर दिया।
अमित शाह का  लंच के लिए डॉ मिश्रा के घर का चयन कोई मामूली राजनीतिक घटना नहीं कही जा सकती इसके पीछे साफतौर पर यह संकेत कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग वाले घटनाक्रम को लेकर पार्टी कतई कोई विपरीत मानसिकता नहीं डॉ मिश्रा के खिलाफ नही रखती है और डॉ नरोत्तम के कामकाज से हाइकमान पूरी तरह संतुष्ट है।
जैसा कि सर्वविदित है अगले वर्ष पार्टी को चुनाव  का सामना करना है। ऐसी स्थित में पार्टी के भीतर इस बात को लेकर मंथन जोर शोर से चल रहा है कि क्या नंद कुमार चौहान की अध्यक्षता या नेतृत्व में विधानसभा चुनाव का सामना किया जा सकता है?पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वैकल्पिक रूप से पार्टी में कई नामों पर मंथन चल रहा है । जैसी की खबरें बाहर आ रहीं हैं उनपर यदि विश्वास किया जाए तो डॉ नरोत्तम का नाम काफी आगे चल रहा है, कोई बड़ी बात नही डॉ मिस्र को चुनाव से पहले यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी दी जाए औऱ अगले चुनाव में नरोत्तम औऱ शिवराज की जोड़ी पार्टी का मुख्य चेहरा बन जाये ।
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