प्रवीण दुबे
भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव तरूण चुग को जिस प्रकार से ग्वालियर चंबल के चुनावी समर में आगे किया है उसे देखकर अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या तरूण चुग का चेहरा चुनाव के इस महत्वपूर्ण समय में ग्वालियर अंचल में भाजपा कार्यकर्ताओं नेताओं को एकजुट कर पाएगा ?
बुधवार को भिंड में जिस तरह से भाजपा की आमसभा फ्लॉप शो साबित हुई और खुद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव को इसके लिए मीडिया के सामने सफाई देना पड़ी मीडिया द्वारा कार्यकर्ताओं और नेताओं के मंच से नदारद रहने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा की नेताओं को मैंने बैठकों में भेजा है।
वह बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम कहा जा सकता है। ऐसे समय जब पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियां चुनावी मोड पर हैं किसी सार्वजनिक सभा का यूं फ्लॉप हो जाना कई सारे सवाल खड़ा करता है। फ्लॉप सभा ने भाजपा में किस तरह तनाव पैदा किया इसका प्रमाण वहां उपस्थित जीतू जिराती की मंच पर ही दिखाई दी जुंझलाहट से सामने आ गया उन्होंने कहा कि ‘ये लोकसभा स्तर का जनसभा कार्यक्रम है और यहाँ सिर्फ़ 250 आदमी मौजूद है यह संगठन की नाकामी दर्शाता है.’
जब संगठन से जुड़ा राष्ट्रीय महासचिव जैसा बड़ा चेहरा मंचासीन हो और उसी के सामने जीतू जिराती का सभा फ्लॉप होने का सीधा ठीकरा संगठन पर ही फोड़ने के भी तमाम निहितार्थ लगाए जा रहे हैं। इसका विश्लेषण बाद में करेंगे फिलहाल तो सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा हो रहा है कि तरुण चुग जैसे नेता जिसकी कि ग्वालियर चंबल अंचल की राजनीति में कोई बड़ी पहचान नहीं है उन्हे आगे क्यों किया गया है ?