26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के 24 घंटे के भीतर दो किसान संगठनों ने खुद को आंदोलन से अलग कर लिया। दिल्ली पुलिस ने हिंसा मामले में बुधवार को 37 किसान नेताओं पर FIR दर्ज कर 200 उपद्रवियों को हिरासत में लिया। इस एक्शन के करीब 3 घंटे बाद राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने खुद को आंदोलन से अलग कर लिया। भानु गुट ने तो चिल्ला बॉर्डर से अपने टेंट उखाड़ने भी शुरू कर दिए हैं।
सबसे पहले शाम करीब साढ़े 4 बजे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने खुद को आंदोलन से अलग किया। संगठन के चीफ वीएम सिंह ने कहा कि दिल्ली में जो हंगामा और हिंसा हुई, उसकी जिम्मेदारी भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत को लेनी चाहिए। हम ऐसे किसी शख्स के साथ विरोध को आगे नहीं बढ़ा सकते, जिसकी दिशा कुछ और हो।
इसके महज 15 मिनट बाद भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने भी प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया। इसके अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि मंगलवार को दिल्ली में जो कुछ भी हुआ, उससे मैं बहुत दुखी हूं और 58 दिनों का हमारा प्रोटेस्ट खत्म कर रहा हूं। भानु प्रताप सिंह का संगठन चिल्ला बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहा था।
परेड में हिंसा के बाद पुलिस और प्रशासन के 3 एक्शन
जानलेवा हमले, डकैती की धाराओं में 22 केस, 37 किसानों पर शर्तें तोड़ने का मामला दर्ज इनमें राकेश टिकैत, मेधा पाटकर, योगेंद्र यादव, दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर सिंह भी शामिल हैं।
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