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सामने खड़ी पराजय को भी विजय में बदल देता है यह पावन व्रत

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का महत्वपूर्ण स्थान है। फाल्गुन मास में कृष्‍ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। यह पावन व्रत महाशिवरात्रि से दो दिन पहले आता है। विजया एकादशी का व्रत अपने नाम के अनुसार विजय प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। कहा जाता है कि अगर पराजय सामने खड़ी हो तो उस विकट स्थिति में भी विजया एकादशी व्रत विजय दिलाने की क्षमता रखता है। मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी के व्रत से भगवान श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पापों से मुक्ति मिलती है।

कहा जाता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम ने भी विजया एकादशी के दिन समुद्र किनारे पूजा की थी। भगवान श्रीराम सहित पूरी सेना ने एकादशी का उपवास रखा और रामसेतु बनाकर समुद्र को पार किया। विजया एकादशी के महात्म्य के श्रवण व पठन से समस्त पाप दूर हो जाते हैं। यह व्रत विजय प्रदान करने वाला है। इस एका‍दशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा करें। रात्रि में भगवान श्री हरि विष्णु का स्मरण करते हुए जागरण करें। इस व्रत के प्रभाव से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

 

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