एक तरफ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी 26 जुलाई से कक्षा 11 और 12 के स्टूडेंट्स के लिए स्कूल व कोचिंग खोलने की घोषणा की है वहीं दूसरी और अंचल के सबसे बड़े अस्पताल समूह के पीडियाट्रिक विभाग के प्रोफ़ेसर इन हेड साथ ही प्रदेश के बड़े बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अजय गौर का कहना है कि देश में कोरोना की जो स्थिति बन रही है उसे देखते हुए 26 से स्कूल खोलना थोड़ी जल्दबाजी होगी।
Shabd shakti news ने आज इस विषय को लेकर जयारोग्य पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के दो बड़े डाक्टरों से चर्चा की। दोनों ही चिकित्सक इस बात से सहमत नहीं थे कि अभी स्कूल खोले जाएं। जयारोग्य पीडियाट्रिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अजय गौर का मानना है कि जिस प्रकार से देश विदेश की तमाम मेडिकल रिपोर्ट्स में भारत को लेकर यह कहा जा रहा है कि यहां कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे सकती है। कई रिसर्च में इस बात को लेकर भी चेतावनी दी जा रही है की तीसरी लहर में कोरोना संक्रमण सर्वाधिक बच्चों को टार्गेट कर सकता है। यही वजह है कि देश में जहां बच्चों की वैक्सीन के ट्रायल प्राथमिकता से किये जा रहे हैं वहीं अस्पतालों में भी बच्चों के लिए अलग से तैयारी करने के निर्देश हैं। ऐसे हालात में अभी बच्चों को सेफ जोन में मानकर स्कूल खोलना थोड़ा जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि खुद मुख्यमंत्री जी व प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों को लगातार कोरोना के प्रति सचेत रहने को कहा है। यह सही है कि पिछली दो लहरों में कोरोना के प्रति बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की तुलना में बेहतर रही है। लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए की वायरस लगातार नए स्वरुप में सामने आ रहा है।
उधर शहर के एक अन्य बालरोग विशेषज्ञ व जयारोग्य पीडियाट्रिक विभाग के सह प्राध्यापक डॉ रवि अम्बे भी 26 जुलाई से स्कूल खोले जाने के पक्ष में नजर नहीं आए चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि जब तक यह जांच नहीं हो जाती की स्कूलों का सभी स्टाफ वेक्सीनेटेड है स्कूल खोलना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के कुछ राज्यों में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं साथ ही बच्चों पर तीसरी लहर के सर्वाधिक प्रभाव की ओर भी विशेषज्ञ इशारा कर रहे हैं अतः अभी स्कूल खोलने को लेकर थोड़ा और इंतज़ार करना जरूरी है।
यहां हम आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते बुधवार को बड़ी घोषणा की थी कि कक्षा ग्यरहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए 26 जुलाई से विद्यालय खोल दिए जाएंगे। कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए अभी केवल 50 फीसदी क्षमता के साथ ही विद्यालयों को खोला जाएगा। सूचना के मुताबिक 15 अगस्त से छोटी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए भी स्कूल खोलने की योजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही कोचिंग संस्थानों को भी ऑफलाइन मोड में कक्षाएं संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर को रोकने के लिए सावधानी जरूरी है। इसलिए सप्ताह में दो दिन एक बैच और अगले दो दिन दूसरा बैच को विद्यालय में ऑफलाइन कक्षा के लिए आमंत्रित किया जाएगा। मध्य प्रदेश की जनता ने अगर कोरोना गाइडलाइन्स का पालन किया, तो जल्द ही कक्षा नौवीं और दसवीं के छात्रों के लिए भी स्कूलों को खोलने की अनुमति प्रदान कर दी जाएगी। इसके बाद कक्षा छठवीं से आठवीं और फिर पहली से पांचवीं तक के विद्यालय खोले जाएंगे। चूंकि इस घोषणा के लगभग एक सप्ताह बाद कोरोना संक्रमण की तस्वीर देश के कुछ राज्यों में पुनः बिगड़ने लगी है इसको लेकर जहां खुद मुख्यमंत्री ने बीते रोज प्रदेशवासियों को सचेत रहने को कहा है साथ ही आज स्कूल खोले जाने का निर्णय जिले के क्राइसेस मैनेजमेंट ग्रुप पर छोड़ दिया है। वहीं इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR की नई स्टडी ने कुछ नए तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट का दावा है कि वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद भी इन्फेक्शन हो रहा है। इसकी वजह कोविड-19 का डेल्टा वैरिएंट है। यानी वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद भी खतरा टला नहीं है।
यह स्टडी बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर, दूसरी लहर के कमजोर पड़ते ही राज्यों में अनलॉक होने लगा है। जनजीवन सामान्य होने लगा है, लेकिन अब हिल स्टेशनों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर दिख रहे हैं। वह भी बिना मास्क के। सोशल डिस्टेंसिंग भी भुला दी गई है। लिहाजा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को सक्रिय होना पड़ा। उन्होंने लोगों को हिदायत दी है कि कोरोना की लहर कमजोर हुई है, खत्म नहीं हुई। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो तीसरी लहर जल्द ही आ जाएगी और हालात बद से बदतर होते चले जाएंगे।