कॉफिनगेट’ नाम से जाने जा रहे मामले की जांच कर रही सी बी आई ने कहा कि कानपुर में सेना के एक गोदाम में पड़े बॉडी बैग और ताबूत सौंपने की मांग से जुड़ी सेना की याचिका के संबंध में उसकी कोई भूमिका नहीं है. एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी. इससे पहले ऐसी खबरें आयी थीं कि सेना ने गोदाम में पड़े 900 से अधिक बॉडी बैग और 150 ताबूत उसे जल्द सौंपने की मांग की है. दोनों चीजें 1999 में खरीदी गयी थीं और चार लाख डॉलर के घूस के आरोपों और उसके बाद हुई सीबीआई जांच के मद्देनजर ये बॉडी बैग और ताबूत गोदाम में पड़े हुए हैं.
अधिकारी के अनुसार सीबीआई की अदालत में सुनवाई के दौरान सबूत के तौर पर इस्तेमाल के लिए केवल एक ताबूत और एक बॉडी बैग जब्त किए गए हैं.
कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन एनडीए सरकार ने 3000 बॉडी बैग और 500 ऐल्युमिनियम ताबूत की खरीदी का आदेश दिया था. रिश्वत के आरोप लगने के बाद सौदे को रद्द कर दिया गया, लेकिन तब तक 900 बॉडी बैग और 150 ताबूतों की सप्लाई किए जा चुके थे. उस वक्त यह मामला कारगिल ताबूत घोटाले के रूप में उछला था.