Homeव्यापार5 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई दर

5 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई दर

नई दिल्ली। रिटेल महंगाई दर जून में बढ़कर 5% हो गई है, जो 5 महीने में सबसे ज्यादा है। इससे पहले जनवरी में ये 5.07% थी। मई ये 4.87% रही थी। ईंधन और बिजली की महंगाई दर जून में 7.14% पहुंच गई। मई में ये 5.8% थी। फ्यूल और इलेक्ट्रिसिटी बास्केट में बिजली, गैस, तरल और ठोस ईंधन शामिल हैं। घरों का किराया महंगा हुआ है। इसकी महंगाई दर 8.4% से बढ़कर 8.45% हो गई। हालांकि, खाने-पीने का सामान सस्ता हुआ है। इनकी दर 3.10% से घटकर 2.91% रही।
महंगाई का अर्थव्यवस्था पर असर : 
अर्थव्यवस्था पर महंगाई का असर दो तरह से होता है। महंगाई दर बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। महंगाई दर घटती है तो खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे बाजार में नगदी की आवक भी बढ़ जाती है। महंगाई बढ़ने और घटने का असर सरकारी नीतियों पर भी पड़ता है। रिजर्व बैंक ब्याज दरों की समीक्षा में रिटेल महंगाई दर को ध्यान में रखता है। महंगाई पर चिंता जताते हुए आरबीआई ने 6 जून की समीक्षा बैठक में रेपो रेट 0.25% बढ़ाने का फैसला लिया। इस बैठक में आरबीआई ने अप्रैल-सितंबर के लिए रिटेल महंगाई अनुमान 4.8-4.9% कर दिया। इससे पहले अप्रैल की बैठक में के बाद ये 4.7-5.1% था। चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए आरबीआई ने अनुमान 4.4% से बढ़ाकर 4.7% कर दिया। ब्याज दरें तय करते वक्त आरबीआई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) आधारित रिटेल महंगाई दर को ध्यान में रखता है।
दो सूचकांकों के आधार पर तय होती है महंगाई : 
पहला- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) है, जो रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं।
दूसरा- थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई), जो थोक महंगाई का इंडेक्स है। इसमें 435 वस्तुएं शामिल होती हैं। डब्ल्यूपीआई में शामिल ये वस्तुएं अलग-अलग वर्गों में बांटी जाती हैं। थोक बाजार में इन वस्तुओं के समूह की कीमतों में हर बढ़ोतरी का आंकलन थोक मूल्य सूचकांक के जरिए होता है। इसकी गणना प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और अन्य उत्पादों की महंगाई में बदलाव के आधार पर की जाती है।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments