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मध्यप्रदेश के इन दो कद्दावर नेताओं को लेकर जारी है असमंजस के हालात

मध्यप्रदेश के दो कद्दावर नेता व वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा व नरेंद्र तोमर इसबार कहां से चुनाव लड़ेंगे इसको लेकर सस्पेंस लगातार बरकरार है। तोमर जहां ग्वालियर से सांसद हैं वहीं मिश्रा ग्वालियर से ही सटे हुए लोकसभा क्षेत्र मुरैना से सांसद हैं।

 

यूं तो नरेंद्र तोमर मोदी मन्त्रीमण्डल के वजनदार मंत्री हैं और उनके लोकसभा टिकट को लेकर कोई संदेह भी नहीं है ,लेकिन जिस प्रकार की जानकारी मिली है श्री तोमर इसबार ग्वालियर से चुनाव मैदान में नहीं उतरना चाहते हैं उन्होंने मुरैना संसदीय सीट से लड़ने की इच्छा जाहिर की है।  उससे असमंजस बढ़ गया है।उल्लेखनीय है कि श्री तोमर ग्वालियर से पूर्व मुरैना लोकसभा सीट से  भी सांसद रह चुके हैं।

 

यदि ऐसा होता है तो मुरैना से पार्टी के वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। एक चर्चा यह भी है कि पार्टी श्री मिश्रा को ग्वालियर से मैदान में उतार सकती है। लेकिन ग्वालियर अंचल में विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी को मिली शर्मनाक हार तथा हाल ही में छत्तीसगढ़ में टिकट वितरण को लेकर भाजपा हाईकमान ने जिस प्रकार का सख्त रवैया अख्तियार किया है उसे देखते हुए  इस बात की सम्भावना कम ही है कि पार्टी किसी बड़े नेता के नाम को तवज्जो देते हुए टिकट वितरण करेगी। उसके लिए केवल और केवल जीत ही मापदण्ड होगा।

 

इस कसौटी पर अनूप मिश्रा और नरेंद्र तोमर को कसा जाए तो श्री मिश्रा का परफॉर्मेंस अच्छा नहीं रहा है।वे लगातार दो विधानसभा चुनाव भितरवार से हारे हैं, जहां तक मुरैना लोकसभा से उनके प्रदर्शन की बात है तो वह भी बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। विधानसभा की सभी सीटों पर यहां से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और श्री मिश्रा की व्यक्तिगत छवि भी यहां से बहुत बेहतर नहीं रही है ऐसे हालात में पार्टी पुनः उनपर दांव लगाएगी इसकी सम्भावना कम ही नजर आती है।

दूसरी और नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ ग्वालियर में पार्टी के भीतर से जो गुस्सा दिख रहा है पार्टी हाईकमान यदि उसे तवज्जो देता है तो श्री तोमर को मुरैना से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। इसकी सम्भावना पिछले चौबीस घण्टे में बेहद बढ़ गई दिखती हैं।

 

सवाल यह पैदा होता है कि श्री तोमर की जगह ग्वालियर से किस नेता को टिकट के लिए चुना जाएगा ? निःसन्देह पार्टी हाईकमान के लिए यह चयन करना बेहद कठिन होगा। इसके लिए जयविलास पैलेस भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यदि पार्टी इसपर विचार करती है तो यशोधरा राजे सिंधिया को मैदान में उतारा जा सकता है। लेकिन यह उन्ही परिस्थितियों में सम्भव होगा जब कांग्रेस की ओर से महल के भीतर से ज्योतिरादित्य अथवा उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी यहां से मैदान में न हों। ऐसा इसलिये क्योंकि महल की यह परंपरा रही है कि यहां से दो प्रत्याशी कभी आमने सामने नहीं आते हैं। ऐसी परिस्थिति में भाजपा किसी अन्य नाम पर भी विचार कर सकती है। यह नाम विवेक शेजवलकर, नरोत्तम मिश्रा का भी हो सकता है।

 

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