भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के जीवन में रामजन्म भूमि अयोध्या का विशेष महत्व रहा है कौन भूल सकता है पवैया के उस त्याग को जब उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में अपनी सक्रीय भूमिका के चलते इंजीनियर की नोकरी छोड़ दी थी । इसके साथ ही जयभान सिंह पवैया ने रामजनभूमि मंदिर आंदोलन के पुरोधा रहे महंत नृत्य गोपाल दास को भी गुरु रूप में स्वीकार किया और उनके प्रति बला की श्रध्दा उनके जीवन का आदर्श रही। जब रामजनभूमि आंदोलन अपने चरम पर था तभी से लेकर आजतक गुरू शिष्य की इस मंगल जोड़ी भव्य राममन्दिर निर्माण के लिए पुरजोर आवाज उठती रही । इसे सुखद संयोग ही कहा जाएगा की इस आंदोलन के लगभग 34 वर्ष पुराने संघर्ष के बाद अब अयोध्या में भव्य राममन्दिर निर्माण की सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं और इसके लिए गठित ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को बनाया गया है। चूंकि महंत श्री का ग्वालियर से विशेष लगाव रहा और यहाँ गोला का मंदिर पर उन्ही की प्रेरणा से श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण हुआ है। संत श्री यहां आते रहे हैं। राममन्दिर निर्माण की समस्त बाधाएं दूर होने और इसके लिए गठित ट्रस्ट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद नृत्य गोपाल दास जी विगत दिवस ग्वालियर के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर पूजा अर्चना करने पहुंचे। इस दौरान उनके प्रिय शिष्य जयभान सिंह ओर उनका मिलन भावुक कर देनेवाला क्षण था। गुरु शिष्य दोनों मिले तो कई बार थे लेकिन इसबार के मिलन ने मंदिर निर्माण के संघर्ष की34 सालों की स्मृतियों को जैसे जीवंत कर दिया था। जयभान सिंह पवैया लगातार दो दिनों तक अपने इस गुरु की सेवा में जुटे रहे और आज सैकड़ों भक्तों के साथ उन्होंने नृत्य गोपाल दास जी को भव्य मंदिर निर्माण के पवित्र कार्य के लिए विदा किया।
अयोध्या में भव्य राममन्दिर निर्माण के संकल्प की अमरगाथा है गुरु शिष्य की यह जोड़ी
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