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क्या सत्तारूपी सुंदरी को बंधक बनाकर लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान नहीं कर रहे कमलनाथ ?

प्रवीण दुबे

मुख्यमंत्री कमलनाथ भले ही भाजपा द्वारा अपने 22 विधायकों को बंदी बनाकर रखने का आरोप लगा रही है लेकिन पिछले एक सप्ताह से जिस प्रकार का गैर संवैधानिक कृत्य का प्रदर्शन मुख्यमंत्री कमलनाथ व उनके मुख्य सलाहकार दिग्विजयसिंह द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि बहुमत न होने के बावजूद खुद कमलनाथ ने सत्तारूपी सुंदरी को बंधक बना पकड़कर रख लिया है और वे उसे छोड़ना नहीं चाहते। सत्ता के मोहपाश में कमलनाथ इस कदर बावले हो गए हैं की  वे प्रदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन महामहिम के आदेश को भी सरेआम ठेंगा दिखाने की बड़ी संवैधानिक गलती करने से भी बाज नहीं आ रहे। इस सम्पूर्ण घटनाक्रम में   विधानसभा अध्यक्ष का रवैया भी बेहद आश्चर्यजनक दिखाई देता है। वे न तो  ईमेल से आये स्तीफों को मान्य कर रहे हैं और हाथों हाथ भेजे स्तीफे भी उन्हें सन्देहास्पद लग रहे हैं। वे कहते हैं की वे इनकी स्वतः जांच करेंगे। कितनी हास्यस्पद बात है की इन 22 विधायकों में से 6 के स्तीफों को तो मंजूर कर लिया जाता है लेकिन 16 को नामंजूर कर दिया जाता है। साफ है विधानसभा अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री तक सत्ता के लालच में न तो महामहिम का सम्मान कर रहे हैं और न ही संविधान का वे मनमाना आचरण कर रहे हैं। लोकतंत्र की दृष्टि से यह कतई अच्छा नहीं कहा जा सकता है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है वो लगातार गलतियों पर गलती करके जनमानस के बीच न केवल अपनी जमीन खोती जा रही है बल्कि लोग उसे अपरिपक्व राजनीतिक समझ वाले नेताओं का दल मानकर उससे दूर होते चले जा रहे हैं। इसका प्रमाण है देश के कई ऐसे राज्य जहां कभी कांग्रेस का एक छत्र राज था और आज कोई नामलेवा तक नहीं बचा है। ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता के साथ इस प्रकार का अपमानित करने वाला आचरण कभी नहीं होता ,मुख्यमंत्री जैसे बड़े पद पर आसीन नेता सच्चाई को स्वीकार करने के बजाय सिंधिया जैसे नेता से यह कभी नहीं कहता की सड़कों पर उतरना है तो उतर जाएं। निःसंदेह कांग्रेस के नेताओं के अपरिपक्व और मर्यादाहीन कार्य कलापों के कारण ही आज मध्यप्रदेश में बड़ा संवैधानिक गतिरोध पैदा हुआ है। यह वह देश है जहां अटलबिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने लोकतंत्र की मर्यादा को कायम रखने केवल एक वोट कम होने पर सत्ता को तिलांजलि देने का आदर्श प्रस्तुत किया था। उन्हीं अटलजी के गृह प्रांत में सत्ता के लालच में लोकतंत्र के मूल्यों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं यह बेहद शर्मनाक है। ऐसे समय में जब देश एक महामारी से लड़ रहा है उस समय उसी महामारी की आड़ में सत्ता बचाने की शकुनी चाल का सहारा लेने की कोशिश की जा रही है जबकी ऐसे समय में संवैधानिक संकट खड़ा करने के बजाए महामारी  से निपटने की रणनीति पर सरकार का ध्यान होना चाहिए ,दुख है की कांग्रेस इस ओर न सोचकर मध्यप्रदेश में अपनी सत्ता बचाने के लिए इस महामारी का इस्तेमाल कर रही है यह बेहद शर्मनाक है।

 

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