ग्वालियर /उपचुनाव के निपटने के महज एक सप्ताह के भीतर जिला प्रशासन ने वार्डों के पुनः आरक्षण की प्रक्रिया को पूर्ण करके नगरीय निकाय चुनाव की सरगर्मी को तेज कर दिया है। अब सबकी निगाहें चुनाव की तारीख पर टिकी हुई है जैसे की संकेत मिल रहे हैं जनवरी माह में नगरीय निकाय चुनाव कराए जा सकते हैं। इसकी घोषणा के पहले जिला प्रशासन चुनाव सम्बन्धों जरूरी काम निपटाने में जुट गया है। चुनाव तिथि की घोषणा के साथ ही एकबार पुनः आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू कर दी जाएगी ।
उधर चुनाव को लेकर शहर में राजनीतिक दलों व उनके कार्यकर्ताओं के बीच सरगर्मी बढ़ गई है। चूंकि नगरीय निकाय के चुनाव वार्ड स्तर पर लड़ा जाता है अतः छोटा चुनाव होने के कारण राजनीतिक दलों के अलावा निर्दलीय चुनाव लड़ने वालों की भी बड़ी संख्या मैदान में रहती है। यही कारण है शहर में चुनावी शोरगुल को नियंत्रित करना स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।
उधर उपचुनाव में उपयोग आई EVM अभी नियमानुसार सुरक्षित रखी जाना है अतः नगरीय निकाय चुनाव के लिए जरूरी संख्या में EVM के अलावा , चुनाव कार्य के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति , मतदान केंद्रों की व्यवस्था, मतदाता सूची आदि से जुड़े तमाम कार्य प्रशासन को पूर्ण करना होंगे।
चुनाव की तारीख और आचरण संहिता का एलान शीघ्र होने वाला है इसके संकेत इस बात से भी मिल रहे हैं की अभी जिले में हुए 3 विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान लाइसेंसी हथियार थानों में जमा हैं। उपचुनाव हो गए हैं, लेकिन प्रशासन ने हथियार वापस करने के आदेश जारी नहीं किए हैं। प्रशासन की मंशा है कि जनवरी में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के बाद ही हथियार वापस दिए जाएं।
ग्वालियर एसपी अमित सांघी ने कहा कि अभी लाइसेंसी हथियार वापस देने के संबंध में आदेश नहीं आए हैं। जनवरी में नगरीय निकाय चुनाव भी है। इसके बाद ही वापस किए जाएंगे।
उधर वार्डों के आरक्षण के बाद शहर में चुनावी माहौल परवान चढ़ने लगा है। वार्डों की गली मोहल्लों में चुनाव लड़ने वालों ने जहां मिलना जुलना तेजकर दिया है। वहीं अपने फोटो वाले बेनर होडिंग भी लगाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनाव तैयारी सम्बन्धी अभी कोई विधिवत कार्यक्रम जारी नबीन किया है न ही रायशुमारी का दौर प्रारम्भ किया है।