यह है मामला
13 मार्च को एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायतों के लिए 10 व 11 दिसंबर 2020 को जारी आरक्षण अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि शासन ने आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। शासन को जवाब पेश करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने यह रोक बहोड़ापुर निवासी अधिवक्ता मनवर्धन सिंह तोमर की जनहित याचिका के बाद लगाई थी।
अधिवक्ता अभिषेक सिंह भदौरिया ने तर्क दिया था, शासन ने 81 नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायतों को अनुसूचति जाति व जनजाति के लिए आरक्षित किया है। जैसे, मुरैना व उज्जैन नगर निगम के महापौर का पद वर्ष 2014 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। वर्ष 2020 में भी इन सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखा है। नगर पालिका व नगर पंचायतों में भी ऐसा ही किया गया है, जबकि 2020 के चुनाव में रोटेशन प्रणाली का पालन करते हुए बदलाव करना था। इससे अन्य वर्ग के लोग चुनाव नहीं लड़ पा रहे।