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पेट्रोल के बढ़ते दाम ने बढ़ाया सरकार का टेंशन , पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी दायरे में लाने की कवायद तेज

पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि के चलते इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने की कवायद तेज हो गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि 18 जनवरी को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। इससे दामों में कमी आएगी।  लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती का विकल्प भी खुला रखा है। मगर इस बारे में जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद फैसला किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते पेट्रोल और डीजल के मूल्य में इजाफा जारी है। राजधानी में पेट्रोल की कीमत 71.18 रुपए और डीजल 61.74 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जो पिछले साढे तीन साल (अगस्त 2014) के बाद सबसे ज्यादा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्राकृतिक गैस पर पांच फीसदी जीएसटी लगाने का प्रस्ताव है। ज्यादातर राज्य इस प्रस्ताव पर सहमत हैं। इसके साथ सरकार एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) को भी जीएसटी के दायरे में लाने के पक्ष में है।

मंत्रालय का मानना है कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोलियम पदार्थो को जीएसटी के दायरे में लाना बेहद जरूरी है। इस पर चर्चा जारी है। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो जीएसटी के साथ सेस भी लग सकता है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड और चंडीगढ़ एक-समान सेस लगा सकते हैं ताकि, इन राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमत एक रहें। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बढ़ती कीमतों के चलते पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से पेट्रोलियम पदार्थो को जीएसटी के दायरे में लाना एक बेहतर विकल्प है।

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