ग्वालियर । सुप्रसिद्ध गीतकार पंडित दामोदर शर्मा का कल 13 दिसंबर की रात्रि लगभग 12 बजे अपनी अनंत यात्रा पर प्रस्थान कर गए।
गीति काव्य के प्रणेता एवं परंपरागत गीत शैली के अद्भुत गीतकार दामोदर शर्मा एक अप्रतिम गीतकार थे।
60 के दशक में मध्यप्रदेश शासन साहित्य परिषद ने उन्हें अपने प्रतिष्ठित गीत पुरस्कार “ठाकुर पुरस्कार” से सम्मानित किया था। 70 के दशक में उनका एक अनूठा गीत संग्रह ‘मन बंधा नहीं’ शीर्षक से सुधि श्रोताओं के बीच आया। उन्होंने लगभग 50 से अधिक वर्ष तक कवि सम्मेलनों में भी अपनी गरिमामय प्रस्तुति देकर पर्याप्त यश, कीर्ति अर्जित की। कुछ वर्ष पूर्व ही उन्हें कलकत्ता की एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा उनके नवीनतम खंड काव्य “सूली उपर सेज पिया की” पर 51000 रु. के पुरस्कार से सम्मानित किया था। वे जितने श्रेष्ठ गीतकार थे उससे कहीं अधिक शालीन, सौम्य और सुमधिर व्यक्तित्व के धनी थे। ऐसे व्यक्ति एवं गीतकार विरले ही पैदा होते हैं। उनके निधन पर साहित्य जगत में शोक की लहर है,घनश्याम भारती ने अपने शोक संदेश में कहा कि
इसे दुर्भाग्य कहें या विडंबना धीरे धीरे हमारे ग्वालियर शहर के गीत के पुरोधा महाप्रयाण पर जा रहे हैं। अभी लगभग 7 माह पूर्व ही दादा रामप्रकाश अनुरागी हमसे बिछड़ गए थे, उस अवसाद से अभी उभर ही नहीं पाए थे कि ये दर्दनाक समाचार हमें सदैव के लिए दुखी कर गया। मेरा उनके श्री चरणों में सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके परिवार एवं हम सभी चाहने वालों को इस दारुण दुख से उभरने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।